29 जून, तरसेम जरयाल : पालमपुर में आयोजित एक सप्ताहीय “हेरिटेज एवं टूरिस्ट गाइड क्षमता निर्माण कार्यशाला” के तहत प्रतिभागियों ने विनय अवस्थी बैम्बू आर्ट गैलरी एवं संग्रहालय का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने बाँस से निर्मित ऐतिहासिक मंदिरों, विश्व प्रसिद्ध स्मारकों और सांस्कृतिक धरोहरों की आकर्षक कलाकृतियों का अवलोकन कर कलाकार की सृजनात्मक यात्रा को करीब से जाना।
INTACH धर्मशाला चैप्टर के कन्वीनर डॉ. नरेंद्र अवस्थी ने विनय अवस्थी की सराहना करते हुए कहा कि उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि भारतीय रक्षा सेवाओं और हिमाचल सरकार में सेवाएं देने के बाद विनय अवस्थी ने अपने जुनून को नई दिशा देते हुए बाँस कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियों ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान दिलाकर हिमाचल का नाम रोशन किया है।
डॉ. अवस्थी ने कहा कि वर्ष 2019 से निरंतर मेहनत और समर्पण के साथ तैयार किए गए इस संग्रहालय में हिमाचल के प्रसिद्ध मंदिरों, भारत के ऐतिहासिक स्मारकों और एफिल टॉवर सहित कई विश्व प्रसिद्ध धरोहरों की बाँस से बनी प्रतिकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं। उन्होंने इन कलाकृतियों को कलाकार की कल्पनाशक्ति और तकनीकी दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
विनय अवस्थी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास, धैर्य और समर्पण बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, विरासत और स्थानीय कला को नई पहचान देना है।
कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों ने संग्रहालय भ्रमण को बेहद प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक दौरे पर्यटन गाइडों को स्थानीय कला, संस्कृति और विरासत को प्रभावी ढंग से समझने और प्रस्तुत करने की प्रेरणा देते हैं।