हाब्बन में ‘खेत बचाओ अभियान’, किसानों को प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीकों का मिला प्रशिक्षण

27 जून , रवि दत्त भारद्वाज : भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहयोग से चलाए जा रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत पझौता उपतहसील के हाब्बन में किसान जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कृषि विभाग राजगढ़, कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में हाब्बन और आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी हासिल की।

शिविर के दौरान कृषि विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ शिव राम ने किसानों को मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, आधुनिक सिंचाई तकनीकों और संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में टिकाऊ खेती अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अभियान का उद्देश्य स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान और समृद्ध भारत की परिकल्पना को साकार करना है।

विशेषज्ञों ने किसानों को नियमित मृदा परीक्षण करवाने और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इससे उत्पादन लागत कम होती है, फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।

शिविर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए जीवामृत, घनजीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और अन्य जैविक विकल्पों के उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही वर्षा जल संचयन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपाय भी बताए गए।

किसानों को नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशकों से सावधान रहने तथा केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही कृषि आदान खरीदने की सलाह दी गई, ताकि आर्थिक नुकसान और फसल हानि से बचा जा सके।

कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील किसान बलदेव सिंह हाब्बी ने प्राकृतिक खेती के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने खेती और बागवानी के लिए जैविक खाद एवं प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करने की विधि भी किसानों को समझाई। इस अवसर पर पंचायत प्रधान कृष्णा शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और करीब 60 किसानों ने भाग लिया।

प्रगतिशील किसान बलदेव सिंह हाब्बी ने कहा कि “खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे, उत्पादन बढ़े और खेती लंबे समय तक लाभकारी बनी रहे। मृदा परीक्षण, जल संरक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग आज की जरूरत है। किसान जितना वैज्ञानिक तरीके से खेती करेंगे, उतना ही उनका खर्च कम होगा और आय में वृद्धि होगी।”

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