22 जून , तरसेम जरयाल: धर्मशाला। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) धर्मशाला चैप्टर द्वारा पर्यटन विभाग तथा राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के सहयोग से हेरिटेज एवं पर्यटन गाइडों के लिए सात दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। 20 से 26 जून तक आयोजित होने वाली इस कार्यशाला का उद्देश्य स्थानीय पर्यटन गाइडों को जिम्मेदार पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण तथा पेशेवर कौशलों के प्रति प्रशिक्षित करना है, ताकि वे प्रदेश की समृद्ध धरोहरों के प्रभावी प्रतिनिधि बन सकें। 
कार्यक्रम में INTACH की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मालविका पठानिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर INTACH धर्मशाला चैप्टर के कन्वीनर डॉ. नरेंद्र अवस्थी, राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया, पर्यटन एवं विरासत विशेषज्ञ प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ तथा INTACH की प्रतिनिधि तिविशी गौतम भी मौजूद रहीं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. नरेंद्र अवस्थी ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए INTACH की स्थापना, उद्देश्यों तथा देशभर में किए जा रहे विरासत संरक्षण कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1984 में स्थापित INTACH आज देश के सबसे बड़े विरासत संरक्षण संगठनों में शामिल है और भारत की सांस्कृतिक, प्राकृतिक तथा वास्तुकला धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
मुख्य अतिथि मालविका पठानिया ने अपने संबोधन में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, ऐतिहासिक धरोहरों के पुनरुद्धार तथा स्थानीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में पर्यटन गाइडों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास और संस्कृति को जीवित रखने के लिए अपनी जड़ों के प्रति गर्व और समर्पण की भावना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में प्रशिक्षित और जागरूक गाइड अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इस दौरान प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ने पर्यटन गाइडों को विरासत, संस्कृति और पर्यटन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक सफल पर्यटन गाइड के लिए केवल ऐतिहासिक तथ्यों और सांस्कृतिक जानकारी का ज्ञान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि प्रभावी संवाद क्षमता, व्यवहार कुशलता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और पर्यटकों के साथ सकारात्मक संबंध स्थापित करने की योग्यता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने सॉफ्ट स्किल्स के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक दक्ष और प्रशिक्षित गाइड किसी भी पर्यटन स्थल की सकारात्मक छवि बनाने के साथ-साथ पर्यटकों के अनुभव को भी बेहतर बनाता है।
प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं युवाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान करने के साथ-साथ प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूक भी बनाती हैं। उन्होंने इस पहल को पर्यटन और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
आयोजकों के अनुसार कार्यशाला के आगामी सत्रों में प्रतिभागियों को हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक स्थलों, जिम्मेदार पर्यटन, पेशेवर नैतिकता तथा पर्यटन मार्गदर्शन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कार्यशाला प्रदेश में हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने और प्रशिक्षित पर्यटन गाइडों की नई पीढ़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।