19 जून : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व IAS अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इस पूरे मामले को श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ बड़ा धोखा बताते हुए कहा कि चढ़ावे की गिनती और निगरानी व्यवस्था में गंभीर लापरवाही बरती गई।
एबीपी न्यूज़ से बातचीत में नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि शुरुआती जांच और सामने आए तथ्यों से साफ संकेत मिलते हैं कि काउंटिंग प्रक्रिया के दौरान निगरानी लगभग शून्य थी। उन्होंने कहा कि बैंक और ट्रस्ट के बीच हुए समझौते के तहत दान की गिनती और हिसाब-किताब की पूरी जिम्मेदारी बैंक की थी, लेकिन बैंक अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा।
उन्होंने बताया कि काउंटिंग रूम में बैंक कर्मचारियों की तैनाती अनिवार्य थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अगर तय निर्देशों का सख्ती से पालन होता तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, सीसीटीवी निगरानी रखने, आने-जाने वालों की जांच करने और जवाबदेही तय करने जैसे नियम बनाए गए थे, लेकिन उनका प्रभावी तरीके से पालन नहीं हुआ।
सीसीटीवी फुटेज को लेकर उन्होंने कहा कि फुटेज जानबूझकर डिलीट नहीं की गई, बल्कि ऑटो-डिलीट सिस्टम के तहत हट गई। हालांकि जरूरत पड़ने पर फुटेज सुरक्षित रखी जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
उन्होंने प्रशासनिक प्रबंधन में अनुभव की कमी को भी इस मामले की बड़ी वजह बताया और सुझाव दिया कि ट्रस्ट में तुरंत किसी अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जिसे स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार मिले।