1 मई: हिमाचल प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों के नामांकन के दौरान एक दिलचस्प व्यवस्था सामने आई है। नामांकन फॉर्म में उम्मीदवारों से शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मांगी गई है, लेकिन इसमें एक बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
फॉर्म के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार दसवीं कक्षा से आगे पढ़ा हुआ है, तो उसे अपनी पूरी शैक्षणिक जानकारी देनी होगी। इसमें स्कूल या विश्वविद्यालय का नाम, पढ़ाई पूरी करने का वर्ष और अन्य विवरण शपथ पत्र के रूप में देना अनिवार्य है।
वहीं, दसवीं से कम पढ़े या अनपढ़ उम्मीदवारों के लिए यह बाध्यता नहीं है। ऐसे प्रत्याशी केवल “निल” लिखकर कॉलम भर सकते हैं और उन्हें अपनी पढ़ाई का विस्तृत विवरण देने की जरूरत नहीं होती।
इस व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं, क्योंकि ज्यादा पढ़े-लिखे उम्मीदवारों पर अधिक जानकारी देने की जिम्मेदारी है, जबकि कम पढ़े उम्मीदवारों को छूट मिल जाती है।
मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन ने स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने के लिए किसी भी प्रकार की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं है। अनपढ़ से लेकर पीएचडी तक कोई भी व्यक्ति चुनाव में उम्मीदवार बन सकता है।
गौरतलब है कि हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में पंचायत और निकाय चुनावों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय की गई है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में ऐसा कोई नियम लागू नहीं है।
इसके अलावा, उम्मीदवार के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष होना, संबंधित नगर निकाय की मतदाता सूची में नाम होना और भारतीय नागरिक होना आवश्यक है।