22 अप्रैल: हिमाचल प्रदेश में निर्मित दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी ताजा ड्रग अलर्ट के अनुसार, प्रदेश में बनी 47 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए हैं।
देशभर में इस माह कुल 141 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, जिनमें हिमाचल की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। फेल होने वाली दवाओं में कफ सिरप, इंजेक्शन, हृदय रोग, मिर्गी, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इसके अलावा आयरन और विटामिन की गोलियां, पाउडर, मेहंदी, टूथपेस्ट और साबुन जैसे उत्पाद भी गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर पाए।
CDSCO की रिपोर्ट के मुताबिक, अन्य राज्यों में भी दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, जिनमें उत्तराखंड (20), गुजरात (23), पंजाब (7), राजस्थान (6) और अन्य राज्यों की कम संख्या शामिल है।
इस मामले पर राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि हिमाचल में दवाओं के सैंपल अधिक लिए जाते हैं, क्योंकि देशभर में बनने वाली कुल दवाओं का बड़ा हिस्सा यहीं तैयार होता है। उन्होंने कहा कि जिन दवा कंपनियों के सैंपल फेल पाए जाते हैं, उनके उत्पादन पर रोक लगाई जाती है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फेल दवाओं की जानकारी सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर जारी की जाती है, ताकि लोग इनका उपयोग न करें। साथ ही दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाती है।