3 अप्रैल: लोकसभा में सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता लाने को लेकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ‘राइटफुल टार्गेटिंग’ अभियान के तहत देशभर में लाभार्थियों का व्यापक सत्यापन किया गया है।
इस अभियान में विभिन्न सरकारी डेटाबेस के जरिए 8.51 करोड़ संदिग्ध या अपात्र लाभार्थियों की पहचान की गई, जिनमें आयकर दायरे में आने वाले लोग, कंपनी निदेशक, मृतक, डुप्लीकेट और लंबे समय से राशन न लेने वाले शामिल हैं। सत्यापन के बाद 2.21 करोड़ अपात्र लोगों को सूची से हटाया गया, जबकि 2.64 करोड़ को पात्र पाया गया।
हिमाचल प्रदेश का जिक्र करते हुए अनुराग ठाकुर ने बताया कि राज्य में 5,32,435 लाभार्थियों की जांच की गई, जिसमें से 25,357 फर्जी या अपात्र राशन कार्ड रद्द किए गए, जबकि 55,324 लाभार्थियों को सत्यापन के बाद सूची में बरकरार रखा गया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राशन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए तकनीक का उपयोग कर रही है। देशभर में राशन कार्डों का 100% डिजिटलीकरण किया जा चुका है और अधिकांश लाभार्थियों को आधार से जोड़ा गया है।
साथ ही ई-केवाईसी प्रक्रिया तेज की जा रही है और फेयर प्राइस शॉप्स को ई-पॉइंट ऑफ सेल मशीनों से लैस किया गया है, जिससे वितरण प्रक्रिया बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण के साथ हो रही है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खाद्य सब्सिडी का लाभ केवल जरूरतमंद और पात्र लोगों तक ही पहुंचे।