30 मार्च: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में सामाजिक सुधार की नई पहल देखने को मिली है। गवाली पंचायत के पशमी और घासन गांव के लोगों ने करीब 200 साल पुरानी खर्चीली ‘नेवदा’ रस्म को खत्म कर सादगीपूर्ण शादी की परंपरा अपनाने का फैसला लिया है।
ग्रामीणों ने महासू मंदिर में एकत्रित होकर नए नियम लागू करने का संकल्प लिया। अब शादी समारोह एक सप्ताह की बजाय सिर्फ एक दिन के रिसेप्शन तक सीमित रहेगा। बारात में अधिकतम 10 गाड़ियां और 50 लोग ही शामिल हो सकेंगे।
इसके साथ ही ‘नेवदा’ प्रथा की जगह ‘शगुन’ की परंपरा शुरू की गई है। शादी में सोने-चांदी के दिखावे और दहेज पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। वहीं, लकड़ी काटने की धाम और बकरा दावत जैसी रस्में भी बंद कर दी गई हैं, हालांकि मामा के स्वागत की परंपरा जारी रहेगी।
ग्रामीणों ने नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना और सामाजिक बहिष्कार का प्रावधान भी तय किया है। लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और समय की कमी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि शादी समारोह सरल और किफायती बन सकें।