30 मार्च: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कहा कि दिवालियापन और दिवालिया संहिता (IBC) ने देश के बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इसके लागू होने से कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग में भी सुधार देखने को मिला है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि IBC का उद्देश्य कर्ज वसूली नहीं, बल्कि संकटग्रस्त कंपनियों का समयबद्ध समाधान करना है।
वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार IBC में 12 संशोधन लाने की तैयारी में है। उन्होंने माना कि मामलों के निपटारे में देरी की बड़ी वजह ज्यादा मुकदमेबाजी है। इसे रोकने के लिए नए प्रावधानों में दुरुपयोग करने पर जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा।
नए नियमों के तहत, यदि किसी कंपनी के डिफॉल्ट की पुष्टि हो जाती है, तो इन्सॉल्वेंसी आवेदन को 14 दिनों के भीतर स्वीकार करना अनिवार्य होगा। इससे प्रक्रिया तेज होगी और अनावश्यक देरी पर लगाम लगेगी।