25 फरवरी: कृषि मंत्री प्रोफेसर चंद्र कुमार ने कहा कि जाइका परियोजना का द्वितीय चरण हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों के 296 स्थलों पर क्रियान्वित किया जाएगा। इस चरण का लक्ष्य किसानों की आय को वर्तमान 55 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाना है।
धर्मशाला के धौलाधार हाइट्स सभागार में आयोजित जाइका सहायतित कृषि परियोजनाओं की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि भौगोलिक, सामाजिक और जलवायु चुनौतियों के बावजूद परियोजना ने सिंचाई प्रणालियों के निर्माण और सतत कृषि व्यवस्था स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, फूड प्रोसेसिंग और सुदृढ़ विपणन व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जाएगा। पहले चरण में फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित था, जबकि अब परियोजना का दायरा और विस्तारित किया जा रहा है।
उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे शिटाके मशरूम, मटर, टमाटर, हल्दी, लहसुन, ऑफ-सीजन सब्जियां और मसालों को उपयुक्त क्षेत्रों में प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही उच्च-प्रौद्योगिकी कृषि, उत्कृष्टता केंद्र, पॉलीहाउस, मृदाहीन खेती, मसाला पार्क और आलू प्रसंस्करण इकाई जैसी पहलें भी शामिल हैं।
उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में कई नई योजनाएं शुरू की हैं और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जाइका इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि ताकेउची ताकुरो ने कहा कि परियोजना हिमाचल में कृषि विविधीकरण को मजबूत करेगी। परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने विस्तृत प्रस्तुति दी। इस अवसर पर 100 सिंचाई प्रणालियों और विजन विजिट पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में जाइका के वरिष्ठ प्रतिनिधि वाकामात्सु एजी, बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेश्वर चंदेल, एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, एपीएमसी चेयरमैन निशु मोंगरा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।