13 अक्तूबर: हिमाचल प्रदेश पेंशनरज संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने प्रदेश सरकार से 14 सितंबर, 2026 को पेंशन कम्यूटेशन के नियमों में किए गए संशोधन को तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस संशोधन से 1 जनवरी, 2016 से 31 जनवरी, 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से 25 फरवरी, 2022 की अधिसूचना को बहाल रखने का आग्रह किया है।
सुरेश ठाकुर ने कहा कि वित्त विभाग ने संशोधन के तहत कम्यूटेशन नियम 8 (ii) और (iii) को उक्त अवधि में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के लिए समाप्त कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि संशोधन से पहले कई पेंशनरों के कम्यूटेशन संबंधी मामले महालेखाकार कार्यालय से स्वीकृत हो चुके थे और जिला कोषाधिकारियों को भुगतान के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन नई अधिसूचना के बाद भुगतान रुक गए हैं। इससे प्रत्येक प्रभावित पेंशनर को पांच से दस लाख रुपये तक का नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने इस बदलाव को भेदभावपूर्ण बताते हुए सरकार से अधिसूचना वापस लेने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर पेंशनरों में नाराजगी है। यदि सरकार ने उनकी मांग पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो समिति अन्य लंबित मांगों के साथ इस मुद्दे पर भी आंदोलन तेज करेगी।
सुरेश ठाकुर ने प्रदेश सरकार से कर्मचारियों और पेंशनरों को दिवाली से पहले 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) देने की मांग की। उन्होंने महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की लंबित किस्तों का भुगतान जल्द करने का आग्रह किया, ताकि पेंशनरों और कर्मचारियों को त्योहार से पहले राहत मिल सके।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश पेंशनरज संयुक्त संघर्ष समिति ने 22 सितंबर, 2026 को मुख्यमंत्री को 17 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा था। इसमें 1 जनवरी, 2016 से 31 जनवरी, 2022 तक की लंबित देनदारियों के भुगतान सहित विभिन्न मांगें उठाई गई हैं।
सुरेश ठाकुर ने कहा कि सरकार को 1 जनवरी, 2016 से अब तक सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के वेतन एरियर, संशोधित ग्रेच्युटी की शेष 80 प्रतिशत राशि, संशोधित लीव एनकैशमेंट और क्लास-1 व क्लास-2 अधिकारियों के लंबित पेंशन एरियर की 50 प्रतिशत राशि का भुगतान करना चाहिए।
उन्होंने एचआरटीसी पेंशनरों को तीन प्रतिशत महंगाई राहत और 50 हजार रुपये की पिछली किस्त का भुगतान करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा बिजली बोर्ड के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने, शहरी स्थानीय निकायों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 1 जनवरी, 2016 के वेतनमान के आधार पर पेंशन देने तथा कॉरपोरेट सेक्टर के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन बहाल करने की मांग की।
उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए वर्ष 1999 की पेंशन अधिसूचना बहाल करने तथा पुलिस विभाग के पेंशनरों को कैशलेस चिकित्सा और सेना की तर्ज पर कैंटीन सुविधा उपलब्ध करवाने का भी आग्रह किया।
सुरेश ठाकुर ने कहा कि यदि सरकार संयुक्त संघर्ष समिति को लंबित मांगों पर चर्चा के लिए नहीं बुलाती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में पेंशनरों को दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि डिप्टी रजिस्ट्रार, शिमला की ओर से सुरेश ठाकुर बनाम आत्मा राम मामले में 3 अक्तूबर, 2026 को सुनाए गए फैसले के खिलाफ अपील दायर करने और स्थगन आदेश प्राप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
सुरेश ठाकुर ने आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता पर पेंशनरों के संगठन के मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप करने और पेंशनरों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने राजनीतिक दलों से पेंशनरों के संगठनों के मामलों में हस्तक्षेप न करने की अपील की।