1 अक्टूबर: राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन ‘रबी अभियान 2026’ के दौरान हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने प्रदेश के कृषि क्षेत्र के विकास, किसानों की आय बढ़ाने और पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए केंद्र सरकार से निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
कृषि मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में करीब 88.85 प्रतिशत किसान सीमांत और लघु श्रेणी के हैं। ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण, कृषि अवसंरचना, सिंचाई, आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और बेहतर बाजार व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि छोटी जोत, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अधिक उत्पादन लागत के कारण पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के सामने कई चुनौतियां हैं। ऐसे में पारंपरिक अनाज आधारित खेती के साथ सब्जियों, फलोत्पादन, प्राकृतिक खेती और उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रो. चंद्र कुमार ने बताया कि भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश के कृषि क्षेत्र और किसानों के हित में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत ₹28.31 करोड़ तथा कृषि उन्नति योजना (KY) के तहत ₹36.51 करोड़, यानी कुल ₹64.82 करोड़ की दूसरी किस्त जारी की है। उन्होंने केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि इन निधियों से प्रदेश में कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विकास कार्यों को गति मिलेगी और इसका लाभ किसानों तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन निधियों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करेगी, ताकि अधिक से अधिक किसान केंद्र प्रायोजित योजनाओं का लाभ उठा सकें। कृषि मंत्री ने कृषि अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों और पर्वतीय कृषि की जरूरतों को देखते हुए अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, आधारभूत ढांचे और मानव संसाधन को मजबूत करना आवश्यक है।
प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्राकृतिक खेती के तहत उत्पादित मक्के के लिए ₹50 प्रति किलोग्राम और गेहूं के लिए ₹80 प्रति किलोग्राम का विशेष न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक उत्पादन लागत और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना जरूरी है।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को समय पर और सटीक बाजार जानकारी उपलब्ध करवाना भी आवश्यक है। इसके लिए मंडियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर बाजार भाव, मांग एवं पूर्वानुमान, मौसम और भंडारण की उपलब्धता संबंधी जानकारी मोबाइल संदेश व डिजिटल सेवाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार केंद्र के सहयोग से कृषि क्षेत्र को अधिक सुदृढ़, टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।