30 सितंबर: हिमाचल प्रदेश के रामपुर स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (पोक्सो कोर्ट) किन्नौर ने नाबालिगों के खिलाफ अपराध के दो अलग-अलग मामलों में दोषियों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से उप जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने पैरवी की।
पहले मामले में अदालत ने नेपाल के जिला जुमला, आंचलभेरी निवासी राम बहादुर को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अभियोजन के अनुसार, नाबालिग पीड़िता हृदय संबंधी बीमारी के इलाज के लिए अपनी माता के साथ नेपाल से रिकांगपिओ आई थी। घटना के दिन उसकी माता काम की तलाश में बाहर गई थी। इसी दौरान आरोपी ने नाबालिग को अकेला पाकर अपने कमरे में ले जाकर उसके साथ अपराध किया।
पीड़िता ने आरोपी के फोन से अपनी माता को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलने पर माता ने एक परिचित को मौके पर भेजा, जिसने आरोपी को कमरे में पकड़ लिया। इसके बाद थाना रिकांगपिओ में मामला दर्ज किया गया। तत्कालीन जांच अधिकारी भरत सिंह ने जांच पूरी कर चालान अदालत में पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान 20 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को बीएनएस और पोक्सो अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
दूसरे मामले में अदालत ने अपनी ही नाबालिग बेटी का कथित तौर पर लंबे समय तक शारीरिक शोषण करने वाले पिता को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे 20 वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दोनों फैसलों के जरिए पोक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।