12 सितम्बर: शिमला जिला में टीबी की पहचान, जांच, उपचार और मरीजों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाने की दिशा में बेहतर प्रगति दर्ज की गई है। जिला स्तरीय टीबी मुक्त अभियान समिति की बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जनवरी से अगस्त 2026 तक के आंकड़ों की समीक्षा की गई।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अगस्त 2026 तक प्रिजम्प्टिव टीबी जांच के निर्धारित 24,408 के लक्ष्य के मुकाबले 28,008 लोगों की जांच की गई, जो 115 प्रतिशत उपलब्धि है। टीबी केस नोटिफिकेशन के 1,387 के लक्ष्य के मुकाबले 1,393 मरीजों को नोटिफाई किया गया।
टीबी मरीजों की जांच एवं उपचार प्रक्रिया के तहत एचआईवी स्टेटस ज्ञात करने के लक्ष्य 1,012 के मुकाबले 992 मरीजों का एचआईवी स्टेटस ज्ञात किया गया। इसी तरह ब्लड शुगर की जांच भी 992 मरीजों की की गई। दोनों मामलों में 98 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई।
UDST (Rif Status) के तहत 626 के लक्ष्य के मुकाबले 598 मरीजों की जांच की गई, जबकि टीबी उपचार सफलता दर के लिए निर्धारित 1,103 के मुकाबले 1,015 की उपलब्धि दर्ज हुई, जो 92 प्रतिशत है। निक्षय पोषण योजना के तहत 1,012 लाभार्थियों के लक्ष्य के मुकाबले 766 लाभार्थियों को भुगतान किया गया। DRTB उपचार शुरू करने के मामले में 19 के लक्ष्य के मुकाबले 18 मरीजों का उपचार शुरू हुआ, जबकि TPT के तहत 1,093 के लक्ष्य के मुकाबले 987 की उपलब्धि दर्ज की गई।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि नए पंचायत प्रतिनिधियों को टीबी मुक्त अभियान के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा NCC और NSS के विद्यार्थियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि वे आमजन को टीबी के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा कि जिला में अधिक से अधिक लोगों की जांच सुनिश्चित की जाएगी, ताकि टीबी मुक्त अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच शिमला जिला में 674 टीबी मरीजों में से 28 मरीजों की मृत्यु दर्ज की गई, जिससे कुल मृत्यु दर चार प्रतिशत रही। शिमला शहरी क्षेत्र में 145 टीबी मरीजों में 11 की मृत्यु हुई। वहीं मशोबरा में 153 मरीजों में पांच, रामपुर में 112 में चार, मतियाना में 47 में तीन, चिड़गांव में 39 में एक, जुब्बल कोटखाई में 26 में एक, कुमारसैन में 18 में एक, ननखड़ी में 19 में एक और नेरवा में 53 मरीजों में एक मृत्यु दर्ज की गई। सुन्नी में 15 तथा टिक्कर में 47 टीबी मरीजों में कोई मृत्यु दर्ज नहीं हुई।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी की समय पर पहचान, जांच, उपचार की निरंतरता, मरीजों को पोषण एवं उपचार संबंधी सहायता और टीबी की रोकथाम पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आमजन से अपील की गई है कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते जांच करवाएं और चिकित्सकों द्वारा निर्धारित उपचार का पूरा कोर्स करें।
वर्ष 2025 में शिमला जिला की कुल 412 ग्राम पंचायतों में से 141 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त ग्राम पंचायत घोषित किया गया है। इसके साथ ही जिला की 34 प्रतिशत ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त श्रेणी में शामिल हो गई हैं। रोहड़ू विकासखंड में 37 में से 19, ठियोग में 59 में से 24, बसंतपुर में 24 में से 14, कोटखाई में 26 में से 13 और जुब्बल में 25 में से 11 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हुई हैं।
टुटू में 34 में से 11, नारकंडा में 28 में से 11, छौहारा में 32 में से 9, चौपाल में 48 में से 7, ननखड़ी में 17 में से 7, मशोबरा में 30 में से 6, रामपुर में 37 में से 6 तथा कुपवी में 15 में से 3 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की गई हैं।
टीबी मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों में 23 गोल्ड, 34 सिल्वर और 84 ब्रॉन्ज श्रेणी में शामिल हैं। यह उपलब्धि टीबी की समय पर पहचान, जांच, उपचार, रोकथाम और जनभागीदारी के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। शिमला जिला को पूर्णतः टीबी मुक्त बनाने के लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता और जांच अभियान को लगातार बढ़ाया जा रहा है।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा, डॉ. विनीत लखनपाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पाल सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।