9 सितंबर: जिला कांगड़ा की नूरपुर विधानसभा में राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया, जब पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अकिल बख्शी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर क्षेत्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष संदेश डडवाल और कांग्रेस ब्लॉक महासचिव तरसेम मनहास उर्फ पप्पू मनहास पर कई आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
अकिल बख्शी ने आरोप लगाया कि पंचायत समिति की दुकानों के आवंटन में नियमों की कथित अनदेखी की गई। उनका दावा है कि कुछ दुकानें संदेश डडवाल और उनके करीबी लोगों से जुड़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दुकानों को कम किराये पर लेने के बाद आगे निजी लाभ के लिए अधिक रकम में सबलेट अथवा हस्तांतरित करने का प्रयास किया गया।
बख्शी ने दावा किया कि कुछ लोगों ने पंचायत समिति की दुकानों को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए कथित तौर पर करीब 13-13 लाख रुपये में बेचने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस संबंध में दो व्यक्तियों की ओर से उन्हें लिखित शिकायत अथवा बयान मिले हैं, जिन्हें उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के सामने रखा।
उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अथवा पंचायत समिति की संपत्ति को निजी संपत्ति की तरह बेचने या हस्तांतरित करने का प्रयास किया गया है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने संबंधित दुकानों के आवंटन रिकॉर्ड, किराया रिकॉर्ड, प्रक्रिया तथा कथित सबलेट या हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच करवाने की मांग की।
अकिल बख्शी ने संदेश डडवाल पर उनकी पत्नी की मनरेगा में दिहाड़ी लगाए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में पुराने मस्टर रोल उनके पास मौजूद हैं और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबंधित रिकॉर्ड मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर परिवार से जुड़े लोगों को वेंडर अथवा सप्लायर के रूप में लाभ पहुंचाया गया।
बख्शी ने कहा कि यदि सरकारी योजनाओं और पंचायत की खरीद प्रक्रिया का लाभ बार-बार किसी एक परिवार या करीबी लोगों तक पहुंचता रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मनरेगा के मस्टर रोल, पंचायत की वेंडर सूची, बिल-वाउचर और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच की मांग की।
अकिल बख्शी ने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी धन, सरकारी संपत्ति और जनता के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर पूरे मामले की जांच करवाने की मांग की।
उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दावे का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि सत्तारूढ़ दल से जुड़े पदाधिकारियों पर इस तरह के गंभीर आरोप सामने आते हैं तो उनकी जांच क्यों नहीं होनी चाहिए।
बख्शी ने संदेश डडवाल और तरसेम मनहास उर्फ पप्पू मनहास के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि गंभीर आरोपों के चलते उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने सरकार और प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो अब तक इन मामलों की जांच क्यों नहीं हुई और संबंधित लोगों को किस स्तर से संरक्षण मिल रहा है।