राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में हर्षोल्लास से मनाया संस्कृत दिवस

27 अगस्त, तरसेम जरयाल : राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के संस्कृत विभाग की ओर से प्राचार्य डॉ. राकेश पठानिया के मार्गदर्शन में संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत संस्कृत दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने वैदिक मंगलाचरण और सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

इस अवसर पर अंकिता ने ‘संस्कृत दिवस मनाने का उद्देश्य एवं संस्कृत भाषा के संरक्षण की आवश्यकता’ विषय पर अपने विचार रखते हुए संस्कृत की प्रासंगिकता, वैज्ञानिकता तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद कंगना ने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। अंशू, अंकिता, गुड़िया, अमृता एवं वैष्णवी द्वारा प्रस्तुत संस्कृत गीतिका ने कार्यक्रम में संस्कृतमय वातावरण बना दिया। सचिन कुमार ने महाकवि कालिदास रचित ‘रघुवंशम्’ के प्रथम सर्ग का सस्वर वाचन किया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।

अंकिता ने ‘अधरं मधुरं’ गीत पर शास्त्रीय नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी, जबकि प्रथम वर्ष की छात्राओं ने भगवान श्रीकृष्ण के स्तोत्र पर मनमोहक शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। इसके पश्चात भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा, साहित्य एवं संस्कृति से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली ढंग से विचार रखे। प्रतियोगिता में अंकिता ने प्रथम, रिधिमा शर्मा ने द्वितीय और अतुल शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नाटी की प्रस्तुति देकर हिमाचली लोक-संस्कृति की सुंदर झलक भी प्रस्तुत की। संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित श्लोक लेखन, सूक्ति लेखन एवं संस्कृत साहित्य प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

समारोह के मुख्य अतिथि भौतिक विज्ञान विभाग के डॉ. विक्रम श्रीवत्स रहे। उन्होंने संस्कृत भाषा के महत्व और इसकी समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक एवं ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन का दायित्व केवल संस्कृत विभाग या विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी का सामूहिक कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिदिन थोड़े-थोड़े संस्कृत शब्दों का प्रयोग कर भाषा को अपने दैनिक जीवन से जोड़ने का आह्वान किया।

डॉ. शैली पारुल, डॉ. आरती चंदेल एवं डॉ. शिष्टा शर्मा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। मुख्य अतिथि ने संस्कृत विभाग के विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संस्कृत-वस्तु प्रदर्शनी, प्रतिभा एवं संस्कृत भाषा के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के रचनात्मक और समर्पित प्रयास संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ. स्वर्ण लता शर्मा ने अपने संबोधन में संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन के लिए प्रेरित किया तथा कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। भाषण प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. शैली पारुल एवं डॉ. शिष्टा शर्मा शामिल रहीं।

कार्यक्रम के दौरान संस्कृत-वस्तु प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले सामान्य संस्कृत शब्दों से परिचित करवाया गया। समारोह में डॉ. हर्षा राणा, डॉ. स्वर्ण लता शर्मा, डॉ. शैली पारुल भडवाल, डॉ. शिष्टा शर्मा, डॉ. आरती चंदेल, प्रो. राधे श्याम, डॉ. अमित कटोच, तरसेम जरयाल सहित महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में शांति मंत्र के सामूहिक पाठ के साथ संस्कृत दिवस समारोह का विधिवत समापन हुआ।

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