27 अगस्त:रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और शुभ संकल्प का प्रतीक भी है। रक्षासूत्र का अर्थ ही सुरक्षा के संकल्प के बंधन से है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधते हुए उसकी सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करती है। साथ ही भाई बहन की रक्षा और उसके सम्मान की जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लेता है।
रक्षासूत्र हमें यह संदेश भी देता है कि समाज में प्रत्येक नारी के प्रति सम्मान और बहन की भावना रखी जाए। राखी का धागा केवल एक धागा नहीं, बल्कि शुभ भावनाओं और सकारात्मक संकल्पों का प्रतीक है। वैदिक परंपरा के अनुसार तैयार किए गए रक्षासूत्र में दूर्वा, अक्षत, केसर या हल्दी, चंदन और सरसों का विशेष महत्व माना गया है।
रक्षासूत्र तैयार करने के लिए पीले रंग के ऊनी, सूती या रेशमी कपड़े के छोटे टुकड़े में दूर्वा, साबुत चावल, केसर या हल्दी, शुद्ध चंदन और साबुत सरसों के दाने रखकर उसे बांधा जाता है। इसके बाद इसे कलावे से जोड़कर राखी का स्वरूप दिया जाता है।
रक्षासूत्र में शामिल दूर्वा निरंतर बढ़ते सद्गुणों और जीवन में आने वाली बाधाओं के दूर होने का प्रतीक मानी जाती है। अक्षत अखंड श्रद्धा, पूर्णता और अटूट भावनाओं का प्रतीक हैं। केसर तेज, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है, जबकि हल्दी पवित्रता और शुभता का संदेश देती है।
चंदन शीतलता, संयम और सद्भाव का प्रतीक है। जिस प्रकार चंदन स्वयं शीतल रहकर दूसरों को भी शीतलता और सुगंध प्रदान करता है, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी शांति, सज्जनता और सेवा भाव बना रहे। सरसों तीक्ष्णता का प्रतीक है और यह संदेश देती है कि व्यक्ति अपने दुर्गुणों तथा समाज में व्याप्त बुराइयों के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा रहे।
रक्षासूत्र बांधते समय वैदिक परंपरा में मंत्रोच्चारण के साथ शुभ संकल्प लिया जाता है। यह रक्षासूत्र बहन द्वारा भाई, मां द्वारा बेटे और दादी द्वारा पोते को बांधा जा सकता है। श्रद्धा और प्रेम के साथ शिष्य द्वारा गुरु को भी रक्षासूत्र अर्पित करने की परंपरा है।
रक्षाबंधन का पर्व हमें आपसी प्रेम, सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देता है। यह अवसर केवल रिश्तों को मजबूत करने का नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव, संस्कार और सकारात्मक भावनाओं को बढ़ाने का भी है।
लेखक: स्वस्तिक गौतम, ज्वाइंट सेक्रेटरी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, पंजाब यूनिवर्सिटी
चंडीगढ़