21 अगस्त: हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी के संयुक्त तत्वावधान में डीआरडीए सभागार मंडी में ‘हैम रेडियो—आपातकालीन स्थितियों और आपदाओं के दौरान वैकल्पिक संचार’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी के अध्यक्ष अपूर्व देवगन ने किया।
उपायुक्त ने कहा कि आपदा के दौरान संचार व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भूस्खलन, बाढ़, बादल फटने और भारी बर्फबारी जैसी आपदाओं में सड़क, बिजली और दूरसंचार सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे समय में हैम रेडियो प्रशासन तथा राहत एवं बचाव एजेंसियों के लिए प्रभावी वैकल्पिक संचार माध्यम साबित हो सकता है।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से तकनीकी ज्ञान और कौशल का उपयोग आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य में प्रशिक्षित हैम रेडियो ऑपरेटरों का मजबूत नेटवर्क आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में मददगार होगा।
20 से 22 अगस्त तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंडी, लाहौल-स्पीति, बिलासपुर, कुल्लू, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों के करीब 35 लाइसेंसधारी प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान हैम रेडियो संचालन, आपातकालीन संचार व्यवस्था, रेडियो संचार प्रोटोकॉल, संचार तकनीक, उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग और आपदा के दौरान वैकल्पिक संचार व्यवस्था स्थापित करने की जानकारी दी जा रही है।
एमेच्योर रेडियो भारत (ऑस्कर इंडिया) से नीलकंठ चटर्जी, विल्किस वॉल्टर जैम्स और सयानी डे प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षक नीलकंठ चटर्जी ने बताया कि आपदा के दौरान पारंपरिक संचार नेटवर्क बाधित होने पर हैम रेडियो महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रतिभागियों को एंटीना से लेकर सैटेलाइट आधारित संचार तक विभिन्न तकनीकों की जानकारी देने के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं अथवा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में हैम रेडियो विश्वसनीय वैकल्पिक संचार प्रणाली के रूप में कार्य कर सकता है। इसके माध्यम से सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होता है।