7 अगस्त: हिमाचल प्रदेश की करीब 5,500 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और किसानों-बागवानों की परिवहन संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान तलाशने के लिए राज्य सरकार और भारतीय रेलवे ने पहल तेज कर दी है। सेब के साथ-साथ टमाटर, मटर, शिमला मिर्च और अन्य नकदी फसलों को रेल के माध्यम से देश की प्रमुख मंडियों तक कम लागत, कम समय और सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।
इसी दिशा में गुरुवार को शिमला में भारतीय रेलवे, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, एपीएमसी, आढ़तियों, किसान-बागवान संगठनों और संबंधित विभागों के अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में रेल परिवहन को किसानों के लिए व्यवहारिक और किफायती बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान लोडिंग-अनलोडिंग व्यवस्था, रेल भाड़ा, लॉजिस्टिक्स और मंडियों तक उपज की निर्बाध आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन किया गया।
बैठक में कहा गया कि रेल परिवहन की व्यवस्था प्रभावी और सस्ती होने से बागवानों को उपज ढुलाई पर होने वाले खर्च में राहत मिल सकती है। साथ ही सेब और सब्जियों को कम समय में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत देश की प्रमुख फल एवं सब्जी मंडियों तक पहुंचाना संभव होगा।
हालांकि, किसान और बागवान संगठनों ने स्पष्ट किया कि केवल रेल सेवा शुरू करना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि यदि किसानों को पहले ट्रकों के जरिए अपनी उपज रेलवे स्टेशन तक पहुंचानी पड़े और इसके बाद मालगाड़ी में लोडिंग तथा गंतव्य स्टेशन पर फिर से ट्रकों के माध्यम से मंडियों तक माल पहुंचाना पड़ेगा, तो इससे परिवहन और मजदूरी का खर्च बढ़ सकता है।
बागवान संगठनों ने शिमला के आसपास आधुनिक लोडिंग सुविधा विकसित करने और रेल भाड़े को प्रतिस्पर्धी रखने की मांग उठाई। उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे खेत और बगीचे से मंडी तक की पूरी परिवहन श्रृंखला सुगम और कम खर्चीली हो।
रेलवे अधिकारियों ने किसान-बागवान संगठनों सहित सभी पक्षों से मिले सुझावों को उच्च स्तर पर भेजने और सभी हितधारकों की सहमति से व्यवहारिक मॉडल तैयार करने का भरोसा दिया। इससे आने वाले समय में हिमाचली फल एवं सब्जी उत्पादकों को देश की बड़ी मंडियों तक अपनी उपज पहुंचाने के लिए परिवहन का एक वैकल्पिक और किफायती माध्यम मिलने की उम्मीद है।