29 जुलाई: सोलन में बघाट बैंक के करोड़ों रुपये के ऋण डिफॉल्टर के खिलाफ एआरसीएस (सहकारी समितियों के अतिरिक्त रजिस्ट्रार) की अदालत ने सख्त कार्रवाई करते हुए उसे 30 दिन के लिए जेल भेज दिया है। यह बघाट बैंक के इतिहास में पहला मामला है, जिसमें किसी बड़े ऋण डिफॉल्टर को जेल भेजने का आदेश जारी किया गया है।
एआरसीएस सोलन गिरीश नड्डा ने बताया कि श्याम वर्मा पर बघाट बैंक का करीब 11 करोड़ रुपये का बकाया ऋण है। पुलिस ने मंगलवार को उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें बकाया राशि का कुछ हिस्सा जमा करने का अवसर दिया, लेकिन भुगतान नहीं होने पर हिमाचल प्रदेश लैंड रेवेन्यू एक्ट के तहत 30 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। हालांकि, यदि इस अवधि के दौरान वह ऋण की कुछ राशि जमा कर देते हैं तो उनकी रिहाई संभव होगी।
वहीं, श्याम वर्मा ने बैंक प्रबंधन और अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्हें कई बार मांगने के बावजूद ऋण से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसी आधार पर उन्होंने मामले में अदालत से स्थगन (स्टे) भी लिया हुआ है।
गौरतलब है कि एआरसीएस ने अक्तूबर 2025 में 22 ऋण डिफॉल्टरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे, जिनमें श्याम वर्मा का नाम भी शामिल था। उस समय पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी थी, लेकिन इस बार कार्रवाई सफल रही। बताया जा रहा है कि वह केवल स्वयं ऋण लेने वाले ही नहीं, बल्कि कई अन्य ऋण मामलों में गारंटर भी हैं। इस बीच बघाट बैंक का एनपीए बढ़कर करीब 120 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
एआरसीएस सोलन की अदालत ने इस बार 115 ऋण डिफॉल्टरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। अब तक पुलिस लगभग 20 डिफॉल्टरों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें से अधिकांश ने बकाया राशि का कुछ हिस्सा जमा करने के बाद राहत प्राप्त कर ली, जबकि मंगलवार को गिरफ्तार किए गए तीन अन्य डिफॉल्टरों ने भी आंशिक भुगतान कर अपने गिरफ्तारी वारंट निलंबित करा लिए।