20 वर्षों के अनुभव वाले जितेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों को सिखाईं लोक संगीत की बारीकियां

3 सितंबर: युवा विकास केंद्र के तत्वावधान में डिग्री कॉलेज धर्मशाला में विशेष सांस्कृतिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को कांगड़ा की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक संगीत और पारंपरिक कला से जोड़ना तथा युवा पीढ़ी में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति रुचि एवं जागरूकता पैदा करना रहा।

कार्यशाला में करीब 20 वर्षों का अनुभव रखने वाले लोक संगीत विशेषज्ञ जितेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों को लोक संगीत की विभिन्न विधाओं, पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों, कांगड़ा के प्रसिद्ध लोक नृत्य झमाकड़ा और लोक संगीत की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को लोक गीतों की प्रस्तुति, पारंपरिक संगीत की तकनीकों और लोक संस्कृति के संरक्षण के महत्व से भी अवगत करवाया।

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए लोक गीत एवं संगीत की विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। जितेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का मार्गदर्शन किया और उन्हें संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कार्यशाला के दौरान वक्ताओं ने कहा कि युवा हमारी संस्कृति और परंपराओं के संवाहक हैं। आधुनिकता के दौर में लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के लिए युवाओं की भागीदारी बेहद आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को भी निखारते हैं।

कॉलेज प्रशासन की ओर से प्रधानाचार्य प्रो. राकेश पठानिया, सांस्कृतिक विभाग की हेड डॉ. दीपिका ठाकुर तथा ईको टूरिज्म विभाग के हेड एवं युवा विकास केंद्र से जुड़े डॉ. अमित कटोच ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा विलुप्त होती कांगड़ा की लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भविष्य में भी इस प्रकार की कार्यशालाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता रहेगा।

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