4 जुलाई: हिमाचल प्रदेश में अब सांप के काटने वाले मरीजों को 108 एम्बुलेंस में ही एंटी-स्नेक वैनम देकर तत्काल उपचार शुरू किया जाएगा। इस जीवन रक्षक पहल को प्रभावी बनाने और सांप के डंक से होने वाली मौतों को कम करने के उद्देश्य से शुक्रवार को धर्मशाला में राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) हिमाचल प्रदेश की ओर से आयोजित इस बैठक में सांप के काटने से बचाव और नियंत्रण के लिए स्टेट एक्शन प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इस अभियान के तहत कांगड़ा जिले को विशेष डेमोंस्ट्रेशन साइट के रूप में चुना है। बैठक में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ वन विभाग, आपदा प्रबंधन, पंचायती राज और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी भाग लेंगे। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2030 तक राज्य में सांप के काटने से होने वाली मौतों और स्थायी विकलांगता के मामलों में 50 प्रतिशत तक कमी लाना है।
प्रदेश सरकार ने 26 फरवरी को सांप के डंक को अधिसूचित बीमारी घोषित किया था। इसके बाद सरकारी और निजी सभी अस्पतालों के लिए ऐसे प्रत्येक मामले की रिपोर्ट करना अनिवार्य हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हिमाचल के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों, विशेषकर कांगड़ा, ऊना, चंबा, मंडी और सिरमौर जिलों में मानसून के दौरान सांप के काटने की घटनाएं अधिक सामने आती हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में हर वर्ष औसतन 76 लोगों की मौत सांप के डंक से होती है।
नई कार्ययोजना के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक एंटी-स्नेक वैनम की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही विभिन्न विभागों के समन्वय से जागरूकता और त्वरित उपचार व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने बताया कि कांगड़ा जिला सांप के काटने की घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील है, इसलिए आईसीएमआर ने इसे अपनी विशेष परियोजना के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय बैठक में सभी संबंधित विभागों के सहयोग से प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।