2 जुलाई: हिमाचल प्रदेश के आठ पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है। इससे राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक, कृषि और पारंपरिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। जीआई टैग प्राप्त करने वाले उत्पादों में स्पीति का सीबकथॉर्न (छरमा), सलूणी का सफेद मक्का, चंबा धातु कला, सिरमौरी लोइया, किन्नौरी टोपी, मंडी की सेपूवड़ी, किन्नौरी सेब और किन्नौरी आभूषण शामिल हैं। इसके साथ ही अब हिमाचल प्रदेश के कुल 17 पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह राज्य की पारंपरिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रोत्साहन के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय कारीगरों, किसानों तथा उत्पादकों को भी लाभ होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार चार अन्य पारंपरिक उत्पादों को भी जीआई टैग दिलाने के लिए प्रयासरत है। इनमें चंबा के पांगी क्षेत्र का भोट जौ, चंबा चुख, भरमौर का प्लेक्ट्रैंथस शहद और सिरमौर की अदरक शामिल हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इन उत्पादों के पंजीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।