17 अक्तूबर, तरसेम जरयाल : हिमाचल प्रदेश के 20 महाविद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों, एमआईएस कर्मचारियों, लैब अटेंडेंट और अन्य संबंधित कर्मचारियों के दो माह से लंबित वेतन का मामला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समक्ष उठाया गया। धर्मशाला दौरे के दौरान साई ग्राउंड में हिमाचल प्रदेश व्यावसायिक प्रशिक्षक महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत करवाया। मुख्यमंत्री ने लंबित वेतन जारी करवाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।
महासंघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि समय पर वेतन न मिलने के कारण कर्मचारी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। घर का खर्च चलाने, मकानों और कमरों का किराया देने, बच्चों की जरूरतें पूरी करने तथा अन्य जरूरी खर्चों का प्रबंध करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। कई कर्मचारी उधार लेकर परिवार का गुजारा करने को मजबूर हैं।
महासंघ ने कहा कि आगामी त्योहारों के मद्देनजर कर्मचारियों की आर्थिक चिंताएं और बढ़ गई हैं। ऐसे में दो माह से लंबित वेतन के कारण उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में भी परेशानी हो रही है। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि कर्मचारियों की परिस्थितियों को देखते हुए लंबित वेतन जल्द जारी करवाया जाए।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों और समस्याओं को सुनते हुए लंबित वेतन के भुगतान के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। महासंघ को उम्मीद है कि संबंधित विभागों के स्तर पर प्रक्रिया में तेजी आएगी और कर्मचारियों को त्योहारों से पहले वेतन मिल सकेगा।
महासंघ ने कहा कि कर्मचारी लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब कर्मचारियों को लंबित वेतन जारी होने का इंतजार है।
प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया और आरएस बाली को भी लंबित वेतन की समस्या से अवगत करवाया। साथ ही, व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों ने मांग की कि वी-वॉक (V-Walk) को मुख्यधारा में शामिल किया जाए, ताकि इससे जुड़े कर्मचारियों को भी उचित व्यवस्था का लाभ मिल सके।
इस अवसर पर महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष तरसेम जरयाल, रोहित सभरवाल, हितेश शर्मा, सुशांक गुप्ता सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।