1 मई: हिमाचल प्रदेश की हिमकेयर योजना में सामने आई कथित गड़बड़ियों की जांच अब तेज कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस ब्यूरो ने तीन अलग-अलग टीमें गठित की हैं। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के घोटाले के संकेत मिलने के बाद कार्रवाई को गति दी गई है।
गठित टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पहली टीम प्रदेश और बाहरी राज्यों के निजी अस्पतालों से रिकॉर्ड एकत्र कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मरीजों के इलाज के नाम पर किन-किन सेवाओं का दावा किया गया। दूसरी टीम दस्तावेजों और बिलों की बारीकी से जांच कर रही है, जिसमें ऑपरेशन पैकेज के तहत स्वीकृत मदों और वास्तविक खर्च के बीच अंतर को खंगाला जा रहा है। तीसरी टीम इन दोनों की रिपोर्ट के आधार पर विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करेगी।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि योजना शुरू होने के बाद कई निजी अस्पताल अस्तित्व में आए, जिनमें से कुछ घरों या किराये की इमारतों में संचालित हो रहे हैं। विजिलेंस विभाग अब तक हिमाचल और अन्य राज्यों के 35 निजी अस्पतालों से संबंधित रिकॉर्ड जुटा चुका है।
प्रारंभिक पड़ताल में खुलासा हुआ है कि कई अस्पतालों ने ऑपरेशन पैकेज से बाहर जाकर अतिरिक्त सामान और सेवाओं के बिल जोड़े। कुछ मामलों में मरीजों के नाम पर ऐसे खर्च भी दर्शाए गए, जो वास्तव में किए ही नहीं गए थे। इससे योजना पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ा और नियमों का उल्लंघन हुआ। इस पूरे मामले में 110 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
सरकार ने साफ किया है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद संबंधित अस्पतालों व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।
गौरतलब है कि हिमकेयर योजना का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन सामने आ रही अनियमितताओं ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए