1 सितंबर: ग्राम पंचायत सपाहल में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत महिला एवं बाल अधिकारों पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय हमीरपुर, जिला बाल संरक्षण इकाई हमीरपुर और सीडीपीओ सुजानपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
इस दौरान जिला बाल संरक्षण अधिकारी एवं सीडीपीओ सुजानपुर कुलदीप सिंह चौहान ने कहा कि बेटियां जीवन की निरंतरता और मानव सभ्यता की संवाहक हैं। उन्हें सुरक्षित जीवन, उचित पोषण, शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध करवाना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बेटियों को पर्याप्त अवसर मिलने पर वे किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि आज बेटियां शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, रक्षा और उद्यमशीलता सहित विभिन्न क्षेत्रों में देश और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। हालांकि, कई जगहों पर आज भी बेटियों को समान अधिकार और अवसर नहीं मिल पाते।
कुलदीप सिंह चौहान ने बताया कि पिछले वर्ष जिले में करीब 110 बच्चों को पारिवारिक पहचान में गोद लिया गया, जिनमें अधिकतर बेटियां थीं। उन्होंने कहा कि बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया विधि सम्मत तरीके से की जानी चाहिए। महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए इस प्रक्रिया में भागीदार रहता है और निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से बच्चों को गोद लेने का पक्षधर है।
उन्होंने लोगों से देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद लेने की अपील की। साथ ही बाल विवाह और बाल मजदूरी के खिलाफ शून्य सहनशीलता अपनाने तथा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का हिस्सा बनने का आह्वान किया।
कार्यशाला में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता वीरेंद्र ने महिला एवं बाल अधिकारों तथा प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही कानूनी सेवाओं की जानकारी दी। मिशन वात्सल्य की गैर संस्थागत संरक्षण अधिकारी उर्मिला, संस्थागत संरक्षण अधिकारी शशि पाल, मिशन शक्ति से वंदना और ग्राम पंचायत सपाहल की प्रधान सुनीता ने भी अपने विचार रखे।