8 जुलाई, रवि दत्त भारद्वाज: राजगढ़ उपमंडल के सराहां क्षेत्र स्थित जामन की सैर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेतनानंद महाराज ने रासलीला और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि विवाह एक पवित्र संस्कार है, जिसे सादगी, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों के साथ संपन्न किया जाना चाहिए।
स्वामी हरि चेतनानंद महाराज ने कहा कि कन्यादान और गोदान मानव जीवन के महादानों में शामिल हैं तथा प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार इन पुण्य कार्यों में योगदान देना चाहिए। उन्होंने श्रीकृष्ण की रासलीला का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मनुष्य को इंद्रियों पर नियंत्रण, आत्मसंयम और ईश्वर भक्ति की प्रेरणा देना है। वहीं रुक्मिणी विवाह प्रसंग को जीव और ब्रह्म के दिव्य मिलन का प्रतीक बताते हुए उन्होंने इसे आदर्श जीवन का संदेश बताया।
अपने प्रवचन में स्वामी जी ने विवाह समारोहों में बढ़ती फिजूलखर्ची, दहेज प्रथा और दिखावे पर चिंता जताई। उन्होंने लोगों से संकल्प लेने का आग्रह किया कि वे न दहेज लेंगे, न आभूषणों की अनावश्यक मांग करेंगे और न ही विवाह को दिखावे का माध्यम बनाएंगे। उन्होंने कहा कि विवाह में अनावश्यक खर्च करने के बजाय जरूरतमंद बेटियों के विवाह में सहयोग करना कहीं अधिक पुण्य का कार्य है।
कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह की भव्य झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के दिव्य विवाह की झांकी के दर्शन कर भक्ति भाव से सहभागिता निभाई। कथा पंडाल पूरे समय श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। इस अवसर पर आयोजक एवं जिला परिषद सिरमौर के उपाध्यक्ष बलदेव भंडारी सहित अनेक गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
जामन की सैर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का भी प्रभावी माध्यम बन रही है। कथा मंच से दहेज प्रथा, दिखावे और फिजूलखर्ची जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ दिया गया संदेश श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है।