31 मई : देशभर में युवाओं और किशोरों के बीच तंबाकू उत्पादों का बढ़ता उपयोग चिंता का विषय बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू कंपनियां आकर्षक फ्लेवर, आधुनिक डिज़ाइन और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों का सहारा लेकर युवाओं को अपने उत्पादों की ओर आकर्षित कर रही हैं।
एचपी गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज शिमला के पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री विभाग के लेक्चरर डॉ. अतुल संख्यान के अनुसार, तंबाकू उद्योग नए ग्राहकों को जोड़ने के लिए विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को लक्ष्य बना रहा है। इसके तहत सिगरेट, गुटका और ई-सिगरेट जैसे उत्पादों को आकर्षक पैकेजिंग और विभिन्न फ्लेवर में बाजार में उतारा जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक स्ट्रॉबेरी, मिंट, बबलगम जैसे फ्लेवर युवाओं को तेजी से आकर्षित करते हैं। वहीं ई-सिगरेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को पेन या यूएसबी जैसे डिजाइनों में तैयार किया जाता है, जिससे उन्हें आसानी से छिपाया जा सकता है। सोशल मीडिया पर अप्रत्यक्ष प्रचार, फिल्मों और वेब सीरीज में धूम्रपान को स्टाइलिश दिखाना भी युवाओं को प्रभावित कर रहा है।
निकोटीन कैसे बनाती है आदी?
डॉ. संख्यान ने बताया कि तंबाकू में मौजूद निकोटीन कुछ ही सेकंड में मस्तिष्क तक पहुंच जाती है। इससे डोपामाइन नामक रसायन निकलता है, जो अस्थायी खुशी और राहत का एहसास कराता है। लगातार सेवन करने पर व्यक्ति इसकी आदत का शिकार हो जाता है और धीरे-धीरे निर्भरता बढ़ने लगती है।
कम उम्र में बढ़ रहा गंभीर बीमारियों का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश तंबाकू उपभोक्ता 18 वर्ष की आयु से पहले ही इसकी लत की चपेट में आ जाते हैं। इससे हृदय रोग, स्ट्रोक, कैंसर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
जागरूकता और सख्ती पर जोर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू बिक्री पर सख्ती, फ्लेवर्ड उत्पादों पर नियंत्रण, परामर्श केंद्रों को मजबूत करने और अभिभावकों व शिक्षकों द्वारा जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई है। उनका मानना है कि युवाओं को तंबाकू की लत से बचाने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करने होंगे।