दिल्ली में गूंजा हिमाचली संस्कृति का रंग, जयराम ठाकुर ने प्रवासियों से किया प्रदेश से जुड़े रहने का आग्रह

19 सितम्बर: नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रवासी हिमाचलियों से अपने मूल राज्य हिमाचल से भावनात्मक रूप से जुड़े रहने का आह्वान किया। शनिवार को शाह ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में हिमाचल मंडी जन कल्याण सभा की ओर से आयोजित सायर उत्सव में उन्होंने कहा कि प्रवासी हिमाचली देश के विभिन्न हिस्सों में रहकर अपनी मेहनत और प्रतिभा से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी संस्कृति, सभ्यता और पहचान को हमेशा बनाए रखना चाहिए।

जयराम ठाकुर ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और कोविड महामारी के दौरान प्रवासी हिमाचली संस्थाओं ने सराहनीय भूमिका निभाई। कोविड काल में देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 2.5 लाख लोग हिमाचल लौटे थे। उस दौरान दिल्ली सहित अन्य स्थानों पर प्रवासी हिमाचलियों के ठहरने, भोजन और उन्हें उनके गांवों तक पहुंचाने में इन संस्थाओं ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

उन्होंने पिछले वर्ष मानसून के दौरान हिमाचल में आई भीषण बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि प्रवासी हिमाचली संस्थाओं ने दूरदराज क्षेत्रों में राहत शिविर लगाकर प्रभावित लोगों की मदद की। उन्होंने स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के लिए भी संस्था की सराहना की और भविष्य में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।

जयराम ठाकुर ने प्रवासी हिमाचलियों से व्यापार, रोजगार और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि वे देशभर में हिमाचल के राजदूत की तरह अपनी पहचान बनाएं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल कर रहे हिमाचलियों की सराहना करते हुए उनसे अपनी प्रतिभा के माध्यम से प्रदेश की प्रगति में योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने सभा को अपनी ऐच्छिक निधि से 51 हजार रुपये देने की घोषणा भी की।

इस अवसर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से इस संस्था से जुड़े हैं और इस दौरान सभा ने विभिन्न क्षेत्रों में लगातार प्रगति की है। उन्होंने कहा कि पूर्ण राज्यत्व का दर्जा मिलने के बाद हिमाचल ने देश के मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाई है।

सभा के अध्यक्ष केआर वर्मा ने महानगरों में रह रहे प्रवासी हिमाचलियों के बच्चों को मेडिकल कॉलेजों और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में हिमाचल के छात्रों के समान अवसर देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रवासी हिमाचलियों के बच्चों को बाहरी छात्रों की श्रेणी में रखा जाता है। उन्होंने ऐसे छात्रों के लिए पांच प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का अनुरोध किया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले हिमाचलियों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही हिमाचली संस्कृति पर आधारित रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।

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