कांगड़ा में भ्रूण लिंग जांच पर सख्ती, नियमों का उल्लंघन करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर होगी कार्रवाई

13 अक्तूबर: भ्रूण की लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए जनभागीदारी जरूरी है। इसके लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के साथ आमजन का सहयोग भी महत्वपूर्ण है। यह बात जिला स्वास्थ्य अधिकारी विक्रम कटोच ने सोमवार को सीएमओ कार्यालय धर्मशाला में पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम, 1994 के तहत गठित जिला सलाहकार समिति एवं जिला उपयुक्त प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

उन्होंने बताया कि 30 सितंबर को समाप्त हुई दूसरी तिमाही के दौरान जिले में पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के तहत 19 निरीक्षण किए गए। इस दौरान तीन अल्ट्रासाउंड केंद्रों के नवीनीकरण की प्रक्रिया भी पूरी की गई। इसके अलावा, लोगों को भ्रूण की लिंग जांच के दुष्परिणामों, कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम और बेटियों के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए 137 सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियां आयोजित की गईं।

बैठक में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से प्राप्त आवेदनों पर चर्चा की गई। अल्ट्रासाउंड केंद्रों से संबंधित अनुमोदन के लिए नौ मामलों पर विचार-विमर्श किया गया, जबकि पांच मामलों को पूर्वव्यापी (एक्स-पोस्ट फैक्टो) अनुमोदन प्रदान किया गया। अन्य मामलों में संबंधित संस्थानों को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।

विक्रम कटोच ने विशेष रूप से राज्य की सीमाओं से सटे क्षेत्रों में संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी केंद्रों के लिए पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि नियमों के उल्लंघन की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देने वाले आम नागरिकों को उचित रूप से पुरस्कृत करने का भी प्रावधान है।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि भ्रूण की लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाने के लिए सभी संबंधित संस्थानों को कानून का सख्ती से पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने सभी संबंधित केंद्रों को परिसर में स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले स्थान पर ‘यहां भ्रूण की लिंग जांच नहीं होती’ का सूचना-पट्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में डॉ. अनुपमा, डॉ. स्वाति, डॉ. मनीषा, सुनीता कुमारी, इंदुबाला, कमलेश देवी, नीलम कुमारी और सहायक जिला न्यायवादी गौरव किशन सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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