18 जुलाई: हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों के लिए राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को शिमला में बागवानी विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए घोषणा की कि बागवानों की लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए राज्य सरकार ने 45 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत 30 बैग तक सेब बेचने वाले सभी उत्पादकों का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, जबकि 100 बैग या उससे अधिक सेब बेचने वाले बागवानों के भुगतान की प्रक्रिया भी तेज़ी से शुरू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2022, 2023, 2024 और 2025 में एमआईएस के तहत खरीदे गए सेबों का बकाया भुगतान प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे बागवानों के बैंक खातों में भेजा जा रहा है। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होने के साथ बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त होगी।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बागवानी मंडी मध्यस्थता योजना (एचएमआईएस) की नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप का शुभारंभ भी किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म सेब की खरीद से लेकर प्रसंस्करण तक की पूरी प्रक्रिया का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखेगा, जिससे खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित होगी।
नई व्यवस्था के तहत सेब उत्पादकों को आधार नंबर, भूमि संबंधी विवरण और बैंक खाते की जानकारी के साथ पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। इसके अलावा वे अपनी उपज बेचने के लिए ऑनलाइन टाइम स्लॉट भी बुक कर सकेंगे, जिससे मंडियों में इंतजार का समय कम होगा और खरीद प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी सेब सीजन के दौरान सभी संग्रहण केंद्रों पर पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि बागवानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सरकार का लक्ष्य इस बार सेब खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध बनाना है।