9 जुलाई: हिमाचल प्रदेश को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से बुधवार को धर्मशाला स्थित एचपीटीडीसी होटल द धौलाधार में “दर्शन : हिमाचल प्रदेश में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन पर राउंडटेबल” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन डेवलपमेंट लीडर्स एलायंस (डीएलए), वीज़ा और पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसमें हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के अध्यक्ष आर.एस. बाली मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
आर.एस. बाली ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राउंडटेबल चर्चा से प्राप्त सुझाव प्रदेश की दीर्घकालिक पर्यटन नीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सरकार का लक्ष्य हिमाचल की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है।
उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिले को प्रदेश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए हवाई संपर्क का विस्तार, हेलीपोर्ट और रोपवे परियोजनाओं का निर्माण, जल क्रीड़ा गतिविधियों को बढ़ावा तथा धार्मिक पर्यटन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने जैसे कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके अलावा प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में हेलीपोर्ट विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है।
बाली ने कहा कि श्रद्धालुओं को मंदिरों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ मंदिरों का डिजिटलीकरण भी किया जाएगा। इससे देश और विदेश में रहने वाले श्रद्धालु घर बैठे ऑनलाइन पूजा, आरती और अन्य धार्मिक गतिविधियों के दर्शन कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रसिद्ध कलाकारों और प्रतिष्ठित हस्तियों को ब्रांड एंबेसडर बनाने की योजना है। सांस्कृतिक उत्सवों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक प्रचार माध्यमों के जरिए हिमाचल के धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा।
आर.एस. बाली ने जानकारी दी कि ज्वालामुखी में पर्यटकों की सुविधा के लिए हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया होटल तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा और इसके आसपास लगभग 60 किलोमीटर के दायरे में छह प्रमुख शक्तिपीठों के साथ नदियां, पर्वत, चाय बागान, बौद्ध मठ और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियां मौजूद हैं, जो इसे प्रकृति, अध्यात्म और रोमांच का अनूठा संगम बनाती हैं।
कार्यक्रम के दौरान धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटन से जोड़ने, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण, विरासत संवर्धन तथा सतत पर्यटन को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा की।
इस अवसर पर उपायुक्त हेमराज बैरवा, मुख्य अरण्यपाल बासु कौशल, उप निदेशक पर्यटन विनय धीमान, एसडीएम मोहित रत्न, डीएफओ अमित कुमार, इंटैक की उपाध्यक्ष मालविका पठानिया, नरेंद्र अवस्थी, देचेन नामग्याल, कुलदीप कुमार, डीएलए के संस्थापक संकल्प शुक्ला सहित पर्यटन, संस्कृति, विरासत संरक्षण, आतिथ्य और उद्योग जगत से जुड़े कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।