19 अप्रैल: हिमाचल प्रदेश सरकार की ‘राजीव गांधी प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान’ योजना किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने इस पद्धति से उगाई गई फसलों के लिए उच्च समर्थन मूल्य तय किया है, जिससे प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
नए वित्तीय वर्ष के बजट में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने फसलों के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। अब प्राकृतिक खेती से उगाई गई गेहूं का मूल्य ₹80 प्रति किलो, मक्की का ₹60, कच्ची हल्दी का ₹150 और पांगी घाटी के जौ का ₹80 प्रति किलो निर्धारित किया गया है। इसके अलावा अदरक के लिए ₹30 प्रति किलो का समर्थन मूल्य तय किया गया है।
सरकार ने पशुपालकों को भी राहत देते हुए गाय के दूध का दाम ₹61 और भैंस के दूध का ₹71 प्रति लीटर निर्धारित किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हमीरपुर जिले के एक प्रगतिशील किसान के अनुसार, प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी आय में सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि इस पद्धति में लागत कम आती है, क्योंकि इसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बजाय घर पर तैयार जैविक घोलों का उपयोग किया जाता है।
किसानों का कहना है कि बढ़े हुए दाम और कम लागत के कारण प्राकृतिक खेती अब उनके लिए अधिक लाभकारी साबित हो रही है। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि खेती का यह तरीका स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है।