21 मार्च: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज अपना चौथा बजट पेश करेंगे। यह बजट राज्य की आर्थिक दिशा तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब 1 अप्रैल से केंद्र की राजस्व घाटा ग्रांट (RDG) समाप्त होने जा रही है।
सरकार इस बजट में आर्थिक मजबूती और विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगी। पर्यटन, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा और डेटा स्टोरेज जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है, ताकि निवेश बढ़े और रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर रह सकता है।
प्रदेश इस समय बढ़ते कर्ज और वित्तीय दबाव से जूझ रहा है। राज्य पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है, जबकि हर महीने वेतन और पेंशन पर भारी खर्च करना पड़ता है। ऐसे में सरकार के सामने बिना जनता पर अतिरिक्त बोझ डाले राजस्व बढ़ाने की चुनौती है।
बजट को लेकर कर्मचारियों, पेंशनरों, विधायकों और आम जनता की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। जहां कर्मचारी वर्ग भत्तों और एरियर को लेकर आशान्वित है, वहीं आम लोग महंगाई से राहत और रोजगार के अवसरों की उम्मीद कर रहे हैं।