16 जुलाई: कांगड़ा जिले के 131 पौंग विस्थापित परिवारों को पांच दशक बाद जमीन का मालिकाना हक मिल गया है। झकलेड़, खैरियां, छप्पर, भटोली फकोरियां और भंगोली के पात्र परिवारों को भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र मिलने से अब उन्हें स्थायी निवासी प्रमाण पत्र (बोनाफाइड) सहित अन्य राजस्व दस्तावेज बनवाने में आसानी होगी।
भूमि का मालिकाना हक मिलने पर विस्थापित परिवारों ने खुशी जताई। उनका कहना है कि वर्षों तक अपने अधिकारों और जरूरी दस्तावेजों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन अब इस समस्या का स्थायी समाधान हो गया है। उनका मानना है कि इस फैसले से आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित होगा।
विस्थापितों ने बताया कि 1960 और 70 के दशक में पौंग बांध निर्माण के दौरान हजारों परिवारों को अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़नी पड़ी थी। कई परिवार हरिपुर क्षेत्र में बस गए, लेकिन उन्हें जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला था। अब सरकार ने लंबित मामलों का समाधान कर उन्हें कानूनी स्वामित्व प्रदान किया है।
सरकार ने भूमि आवंटित होने वाले प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का घर बनाने के लिए 3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने का भी निर्णय लिया है, जिससे उनके स्थायी पुनर्वास को मजबूती मिलेगी।
भूमि आवंटन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जा रही है। पहले चरण में हरिपुर के 89 पात्र परिवारों और दूसरे चरण में भटोली फकोरियां के 42 परिवारों को भूमि के पट्टे दिए गए। प्रशासन के अनुसार, वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित मामलों का तेजी से निपटारा किया जा रहा है।
उपायुक्त ने बताया कि भूमि का मालिकाना हक मिलने के बाद अब प्रभावित परिवार आसानी से हिमाचली बोनाफाइड, अन्य राजस्व दस्तावेज, बैंक ऋण, कृषि सब्सिडी और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।