1 जुलाई: चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर 23 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय राज्यसभा सांसद ने मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र लिखा है। विपक्षी दलों ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे मनमाना और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया है।
पत्र में कहा गया है कि एसआईआर प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं, जबकि लोकतंत्र का आधार प्रत्येक वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार देना है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चिंता जताते हुए न्यायपालिका से इस मामले में उचित हस्तक्षेप की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, पत्र पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सहित 23 विपक्षी दलों के नेताओं और निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने हस्ताक्षर किए हैं।
पत्र में कहा गया है कि जब लोकतांत्रिक संस्थाएं अपेक्षित तरीके से कार्य नहीं करतीं, तब देश की जनता न्यायपालिका से निष्पक्ष हस्तक्षेप की उम्मीद करती है। साथ ही विभिन्न राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के प्रभाव और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई