भरमौर के कलाकार लवली शर्मा: जिनकी कूची में बसता है संघर्ष, आस्था और समर्पण

तरसेम जरयाल 24 जनवरी : भरमौर क्षेत्र के बाड़ी गांव के निवासी कमलेश शर्मा उर्फ लवली, सुपुत्र जोगिंदर शर्मा, एक ऐसे कलाकार हैं जिनकी कला केवल चित्र नहीं रचती, बल्कि आस्था, समर्पण और संघर्ष की जीवंत कहानी कहती है। उनकी बनाई गई तस्वीरें देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो देवी-देवता स्वयं चित्रों के माध्यम से संवाद कर रहे हों।
लवली शर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दसवीं तक चंबा और बारहवीं भरमौर से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अपने गुरु प्रकाश चंद धीमान से चित्रकला की विधिवत शिक्षा ग्रहण की और वर्ष 2000 से अपनी कला यात्रा की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्होंने साइन बोर्ड और दीवार चित्रकला से काम शुरू किया, लेकिन निरंतर अभ्यास और लगन के बल पर आज वे पेंटिंग और धार्मिक चित्रकला के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बना चुके हैं।
देवी-देवताओं के चित्रों में उनकी पकड़ इतनी सशक्त है कि देखने वाला भक्ति और आश्चर्य से भर उठता है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और कई बार निजी कार्यक्रमों को त्यागकर अपनी कला को ही प्राथमिकता दी।
लवली शर्मा का मानना है कि यदि हौसले बुलंद हों तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। वे अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के सहयोग, माता भरमाणी, चौरासी देवताओं और भगवान मणिमहेश के आशीर्वाद को देते हैं। साथ ही वे अपने गुरु प्रकाश चंद धीमान के मार्गदर्शन को अपनी कला की मजबूत नींव बताते हैं।
युवाओं को संदेश देते हुए लवली शर्मा कहते हैं कि समय का सदुपयोग करते हुए प्रैक्टिकल ज्ञान और व्यवसायिक शिक्षा पर अधिक ध्यान देना चाहिए। केवल थ्योरी नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास, धैर्य और मेहनत ही सफलता की असली कुंजी है। उनका मानना है कि हर युवा को अपने शौक को पहचानकर पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

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