टीजीटी संस्कृत व हिन्दी को जिला कैडर मानना नियमों के खिलाफ: संस्कृत शिक्षक परिषद्

24 जनवरी: हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद् ने टीजीटी संस्कृत एवं टीजीटी हिन्दी पद को पुनः जिला कैडर घोषित करने संबंधी शिक्षा विभाग के दावों को पूरी तरह निराधार, नियमों के विरुद्ध और विधिक प्रक्रिया का उल्लंघन बताया है। परिषद् ने स्पष्ट किया कि बिना वैधानिक अधिसूचना और भर्ती एवं पदोन्नति नियमों (R&P Rules) में विधिवत संशोधन के किसी पद के कैडर स्वरूप में परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

परिषद् के प्रदेश अध्यक्ष कमलकांत गौतम, महासचिव डॉ. अमनदीप शर्मा, वित्त सचिव लोकपाल, संगठन मंत्री ललित शर्मा एवं राज्य कार्यकारिणी द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि वर्तमान में लागू R&P नियमों और आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार टीजीटी संस्कृत एवं टीजीटी हिन्दी (संविदा) की नियुक्ति और अनुशासनात्मक प्राधिकारी निदेशक, प्रारम्भिक शिक्षा हैं, जो स्पष्ट रूप से इन पदों के राज्य कैडर होने को दर्शाता है।

परिषद् ने कहा कि यदि कोई पद जिला कैडर का होता है, तो उसकी नियुक्ति एवं अनुशासनात्मक शक्तियां जिला स्तर पर उप-निदेशक के पास होती हैं, जबकि टीजीटी संस्कृत एवं हिन्दी के मामले में ऐसी कोई व्यवस्था नियमों में नहीं है। निदेशक स्तर पर सभी प्रशासनिक शक्तियों का केंद्रीकरण यह सिद्ध करता है कि यह पद राज्य कैडर के अंतर्गत आता है। परिषद् ने यह भी बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी में भी इन पदों को राज्य कैडर ही दर्शाया गया है।

परिषद् ने शिक्षा विभाग से सीधा सवाल करते हुए पूछा है कि वह कौन-सी अधिसूचना या नियम संख्या है, जिसके आधार पर टीजीटी संस्कृत एवं हिन्दी को जिला कैडर घोषित किया जा रहा है। परिषद् का कहना है कि विभाग के पास इस दावे के समर्थन में कोई वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है और केवल प्रशासनिक व्याख्या के आधार पर कैडर निर्धारण नहीं किया जा सकता।

प्रदेशाध्यक्ष कमलकांत गौतम ने कहा कि किसी भी पद के कैडर में परिवर्तन केवल मंत्रिमंडल के निर्णय और उसके बाद जारी आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से ही संभव है। वर्तमान में प्रकाशित भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में टीजीटी संस्कृत एवं हिन्दी को राज्य कैडर बताया गया है। इसके बावजूद विभाग द्वारा इन्हें जिला कैडर बताना शिक्षकों के हितों के साथ अन्याय है, जिससे उनकी पदोन्नति और भविष्य की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं।

परिषद् ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस विषय पर स्थिति तुरंत स्पष्ट की जाए। यदि विभाग इन्हें जिला कैडर मानता है, तो संबंधित नियम संशोधन की अधिसूचना सार्वजनिक की जाए, अन्यथा टीजीटी संस्कृत एवं हिन्दी पदों को नियमानुसार राज्य कैडर के रूप में ही बहाल रखा जाए। इस संबंध में परिषद् द्वारा अतिरिक्त निदेशक बी.आर. शर्मा को ज्ञापन भी सौंपा गया।

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