आवाज ए हिमाचल
25 फरवरी।नई दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन मामले में शामिल तीन युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर जिला शिमला के रोहड़ू क्षेत्र से शुरू हुआ घटनाक्रम बुधवार को शिमला में बड़े टकराव में बदल गया। दिनभर चले घटनाक्रम में दिल्ली पुलिस की टीम और हिमाचल पुलिस आमने-सामने आ गईं, जिससे कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।पुलिस सूत्रों के अनुसार 23 फरवरी को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के रहने वाले तीन युवक—अरबाज, सौरव और सिद्धार्थ—रोहड़ू के बडियारा स्थित एक निजी होटल में ठहरे थे। बताया जा रहा है कि कमरा एक स्थानीय युवा कांग्रेस नेता के नाम पर बुक था और 24 फरवरी को तीनों युवक कमरा नंबर 206 में ठहरे हुए थे। बुधवार सुबह करीब 5 बजे दिल्ली पुलिस के तीन कर्मचारी वर्दी में होटल पहुंचे और स्टाफ को कमरे का दरवाजा खोलने को कहा। इसके बाद तीनों युवकों को अपने साथ ले जाया गया। आरोप है कि दिल्ली पुलिस होटल का रजिस्टर और अन्य दस्तावेज भी साथ ले गई।
घटना की सूचना मिलते ही हिमाचल पुलिस ने नाकाबंदी कर दी। सुबह करीब 10 बजे शोघी बैरियर पर दिल्ली पुलिस की दो गाड़ियों को रोक लिया गया, जबकि एक वाहन निकल गया जिसे सोलन जिले के धर्मपुर में पकड़ लिया गया। बताया गया है कि दिल्ली पुलिस के पांच से छह कर्मचारी वर्दी में थे और कुछ सादे कपड़ों में भी मौजूद थे।
दोपहर में हिमाचल पुलिस दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों को लेकर शिमला के चक्कर स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय पहुंची, जहां एसीजेएम कोर्ट नंबर 2 में पेशी की गई। कोर्ट परिसर में शाम तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहसबाजी भी हुई।हिमाचल पुलिस का कहना है कि दूसरे राज्य की पुलिस को किसी भी कार्रवाई से पहले स्थानीय पुलिस को सूचित करना अनिवार्य है। गिरफ्तारी वारंट, स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी और वीडियोग्राफी जैसी प्रक्रियाओं का पालन जरूरी होता है। हिमाचल पुलिस के अनुसार दिल्ली पुलिस ने इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया, जिससे उनकी कार्रवाई अवैध प्रतीत होती है।
हालांकि रात करीब 7:30 बजे केंद्रीय गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस तीनों युवकों को अपने साथ लेकर रवाना हुई। लेकिन शोघी बैरियर पर एक बार फिर दिल्ली पुलिस की टीम को रोका गया और एफआईआर की प्रति दिखाते हुए सहयोग की अपील की गई। सूत्रों के अनुसार बाद में दिल्ली पुलिस टीम को हिरासत में ले लिया गया।यह मामला अब अंतरराज्यीय अधिकार क्षेत्र और कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर बड़े विवाद का रूप ले चुका है।