आवाज ए हिमाचल
22 फरवरी।जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छात्रू इलाके में रविवार को सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों में हुई भीषण मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के टॉप पाकिस्तानी कमांडर समेत तीन आतंकियों को मार गिराया गया। सुरक्षाबलों ने आतंकियों के छिपे ठिकाने (ढोक) पर सटीक कार्रवाई करते हुए रॉकेट दागा, जिससे तीनों आतंकी मारे गए। धमाके के बाद उनके शव पूरी तरह जले हुए हालत में बरामद किए गए। मारे गए आतंकियों में 10 लाख रुपये के इनामी कमांडर सैफुल्लाह के शामिल होने का संदेह जताया जा रहा है। घटनास्थल से दो एके-47 राइफलें और भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद हुआ है।
इस ऑपरेशन की सफलता में भारतीय सेना के डॉग ‘टायसन’ की भूमिका बेहद अहम रही। सेना की 2-पैरा के9 यूनिट के इस जांबाज कुत्ते ने आतंकियों की सटीक लोकेशन का पता लगाया। जब ढोक में आतंकियों के छिपे होने की आशंका हुई, तो टायसन को आगे भेजा गया। उसने निडरता से ठिकाने के पास पहुंचकर उनकी मौजूदगी की पुष्टि की। इसी दौरान आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी और एक गोली टायसन के पैर में लगी। घायल होने के बावजूद उसने अपनी जिम्मेदारी निभाई। बाद में उसे रेस्क्यू कर एयरलिफ्ट के जरिए उधमपुर स्थित सेना के कमांड अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यह ऑपरेशन पिछले 36 दिनों से जारी था। 18 जनवरी से सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के जवान ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ के तहत छात्रू क्षेत्र में तलाशी अभियान चला रहे थे। समुद्र तल से करीब 5000 फीट की ऊंचाई, शून्य से नीचे तापमान, तीन फीट से अधिक जमी बर्फ, घने जंगल और पथरीले रास्तों के बीच जवानों ने लगातार आतंकियों का पीछा किया। किश्तवाड़ मुख्यालय से करीब 85 किलोमीटर दूर यह इलाका बेहद दुर्गम है, जहां दिन में भी सर्च ऑपरेशन जोखिम भरा होता है।
रविवार को पासरकोट-वानीपुरा के पहाड़ी क्षेत्र में मुठभेड़ के बाद जब गोलियों की गूंज थमी, तो जवानों के चेहरों पर थकान नहीं बल्कि मिशन की सफलता का संतोष था। यदि मारे गए आतंकियों में सैफुल्लाह की पुष्टि होती है, तो इसे क्षेत्र में जैश नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।