16 फरवरी: हिमाचल प्रदेश इन दिनों वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। केंद्र से मिलने वाले ‘राजस्व घाटा अनुदान’ (RDG) में कमी आने के बाद राज्य की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा है। इस बीच सरकारी खर्च और सेवानिवृत्त अधिकारियों की पुनर्नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, एक ओर वित्त विभाग रिक्त पदों को समाप्त करने तथा नई भर्तियों पर नियंत्रण की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों को विभिन्न पदों पर पुनः नियुक्त किए जाने के निर्णय चर्चा में हैं। प्रदेश में बड़ी संख्या में पंजीकृत बेरोजगार युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसके चलते यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है।
सरकार द्वारा कुछ वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारियों को पुनर्नियुक्ति देने के साथ उन्हें निर्धारित सुविधाएं प्रदान किए जाने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि आर्थिक दबाव के बावजूद खर्चों में अपेक्षित कटौती नहीं की जा रही।
आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा ने स्वीकार किया कि आरडीजी में कमी के बाद राज्य की वित्तीय चुनौतियां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि बड़े पदों पर सेवानिवृत्त अधिकारियों की तैनाती के विषय में आवश्यक समीक्षा की जा सकती है।
वहीं भाजपा नेता विपिन सिंह परमार ने सरकार पर वित्तीय प्रबंधन को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय सलाहकारों की नियुक्ति पर ध्यान दिया जा रहा है।
राज्य की आर्थिक स्थिति और सरकारी निर्णयों को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है, जबकि आम जनता की निगाहें ठोस समाधान पर टिकी हैं।