07 फरवरी: चंबा जिले के सीमांत और जनजातीय क्षेत्रों में तैनात विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) का मानदेय बंद होने से करीब 500 जवानों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश सरकार की ओर से बजट जारी न होने के कारण एसपीओ को समय पर मानदेय नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
एसपीओ जिले के सीमावर्ती इलाकों में पुलिस बटालियन के साथ-साथ थानों और चौकियों में सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान में विशेष पुलिस अधिकारियों को 9200 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है, जिसमें 6000 रुपये केंद्र सरकार और 3200 रुपये प्रदेश सरकार द्वारा वहन किए जाते हैं। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से नियमित रूप से मानदेय जारी किया जा रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार के हिस्से का भुगतान बजट अभाव के कारण रोक दिया गया है।
स्थिति यह है कि चंबा जिले के पांगी क्षेत्र में तैनात लगभग 65 एसपीओ को पिछले आठ महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भी बीते दो माह से भुगतान बंद है। इससे एसपीओ को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एसपीओ संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष श्याम ठाकुर ने कहा कि विशेष पुलिस अधिकारी पिछले 28 वर्षों से पुलिस विभाग में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन अब मानदेय रोककर उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य विभागों के कर्मचारियों और यहां तक कि आउटसोर्स कर्मियों को भी समय पर भुगतान मिल रहा है, जबकि एसपीओ को मानदेय देने के लिए सरकार के पास बजट नहीं है। इससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि एसपीओ के मानदेय के लिए जल्द बजट का प्रावधान किया जाए। साथ ही पिछले वर्ष बजट में घोषित मानदेय वृद्धि को अप्रैल माह से एरियर सहित लागू किया जाए, ताकि जवानों को राहत मिल सके।
उधर, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार सकलानी ने बताया कि जनजातीय क्षेत्र की ग्रांट अभी प्राप्त नहीं हुई है, जिस कारण मानदेय लंबित है। सरकार के साथ लगातार पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की ओर से जारी मानदेय का भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा है।