वित्तीय कुप्रबंधन का ठीकरा केंद्र पर न फोड़े हिमाचल सरकार, आरडीजी बयान पर अनुराग ठाकुर का पलटवार

2 फरवरी: पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री द्वारा 16वें वित्त आयोग के तहत राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने को लेकर दिए गए बयान पर कड़ा जवाब दिया है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को लेकर कांग्रेस सरकार प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अपने वित्तीय कुप्रबंधन का ठीकरा केंद्र सरकार पर न फोड़े। अनुराग ठाकुर ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश का केंद्रीय करों में डेवोल्यूशन घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है, जो कांग्रेस के अन्यायपूर्ण कटौती के दावों के विपरीत है।

अनुराग ठाकुर ने बताया कि 16वें वित्त आयोग ने विभाज्य पूल में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी 15वें वित्त आयोग के 0.830 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.914 प्रतिशत कर दी है। नए फार्मूले के तहत 2025-26 के बजट अनुमान (बीई) में हिमाचल की पोस्ट-डेवोल्यूशन प्राप्ति लगभग 11,561.66 करोड़ रुपये से बढ़कर 13,949.97 करोड़ रुपये हो गई है, जो करीब 2,388 करोड़ रुपये की वृद्धि को दर्शाती है। उन्होंने इसे केंद्रीय कर डेवोल्यूशन में एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी बताया।

उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत कोविड महामारी से उबरने के लिए आरडीजी को फ्रंट-लोडेड और समयबद्ध संक्रमणकालीन व्यवस्था के रूप में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य राज्यों को 2025-26 तक लगभग शून्य राजस्व घाटे की स्थिति में लाना था।

अनुराग ठाकुर के अनुसार, 16वें वित्त आयोग की समीक्षा में यह सामने आया कि 14वें और 15वें वित्त आयोग के दौरान बड़े पैमाने पर आरडीजी दिए जाने के बावजूद कई राज्यों ने न तो राजस्व संग्रह मजबूत किया और न ही व्यय को युक्तिसंगत बनाया। इसी कारण आयोग ने सामान्य आरडीजी को जारी रखना प्रतिकूल मानते हुए इसे गलत प्रोत्साहन पैदा करने वाला कदम बताया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मोदी सरकार राज्यों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करती। 16वें वित्त आयोग के फार्मूले के तहत कई विपक्षी शासित राज्यों को भी डेवोल्यूशन में लाभ मिला है। आयोग द्वारा किए गए क्षैतिज पुनर्वितरण में जनसंख्या और जनसांख्यिकीय प्रदर्शन का वेटेज बढ़ाया गया, जबकि जीडीपी योगदान को 10 प्रतिशत वेटेज दिया गया और क्षेत्रफल का भार कम किया गया। इस बदलाव से कई राज्यों को लाभ हुआ है, जिनमें विपक्षी शासित राज्य भी शामिल हैं। इसलिए 16वें वित्त आयोग के समायोजन को पक्षपातपूर्ण करार नहीं दिया जा सकता।

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