करसोग में 35 बस रूट बंद होने पर भड़का गुस्सा, 26 सितंबर को चक्का जाम की चेतावनी

12 सितम्बर: मंडी जिले के करसोग क्षेत्र में चरमराई परिवहन व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कुन्हों-घड़ाथा क्षेत्र के चार बस रूट बंद किए जाने के विरोध में स्थानीय लोगों ने विधायक दीप राज के नेतृत्व में करसोग बस अड्डा स्थित हिमाचल पथ परिवहन निगम के कार्यालय में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और बंद बस सेवाओं को तत्काल बहाल करने की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) को कार्यालय से बाहर आकर लोगों के बीच फर्श पर बैठकर उनकी समस्याएं सुननी पड़ीं। ग्रामीणों ने बताया कि बस रूट बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित हुआ है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली विद्यार्थियों, कर्मचारियों, बुजुर्गों और मरीजों को उठानी पड़ रही है।

विधायक दीप राज ने प्रदेश सरकार और एचआरटीसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि करसोग क्षेत्र में बिना किसी ठोस कारण के करीब 35 बस रूट बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन रूटों को बंद करने से निजी बस ऑपरेटरों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि इसका खामियाजा ग्रामीण जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी परिवहन का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को मूलभूत परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाना भी है।

एचआरटीसी के आरएम द्वारा घड़ाथा के लिए बस सेवा तुरंत शुरू करने का आश्वासन दिए जाने के बाद शुक्रवार को धरना समाप्त कर दिया गया। हालांकि, विधायक ने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने प्रशासन को 26 सितंबर तक बंद किए गए सभी 35 बस रूट बहाल करने का अल्टीमेटम दिया है। मांग पूरी न होने पर 26 सितंबर को प्रभावित जनता के साथ सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चक्का जाम करने की चेतावनी दी गई है।

वहीं, एचआरटीसी प्रबंधन का कहना है कि बंद किए गए कुछ रूट आर्थिक रूप से घाटे में चल रहे थे। सरकार की नीति के तहत ऐसे कुछ रूट निजी बस ऑपरेटरों को सौंपे गए थे, लेकिन निजी ऑपरेटरों ने भी इन रूटों पर बसें चलाने में असमर्थता जताई है। इसके चलते कई क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है। अब 26 सितंबर की समयसीमा महत्वपूर्ण हो गई है और लोगों को उम्मीद है कि इससे पहले परिवहन व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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