1 फरबरी: हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार के आम बजट से कई अहम उम्मीदें हैं। राज्य सरकार को विशेष राज्य श्रेणी के लाभ, आपदा राहत के लिए अतिरिक्त सहायता और रेल व हवाई परियोजनाओं के लिए बजटीय प्रावधान की आशा है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर चर्चा की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक मजबूती के लिए केंद्र सरकार से उदार सहायता देने का आग्रह किया। उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान को न्यूनतम 10 हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तय करने की मांग रखी।
मुख्यमंत्री ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग से ग्रीन फंड गठित करने की भी पैरवी की थी, ताकि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा मिल सके।
10 जनवरी को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में हुई बजट पूर्व बैठक में वित्त मंत्री राजेश धर्माणी ने मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा लिया। बैठक में हिमाचल प्रदेश को भूकंप जोन-6 में शामिल किए जाने का मुद्दा उठाते हुए उसी अनुरूप विशेष फंडिंग देने की मांग रखी गई।
उद्योग क्षेत्र से भी केंद्रीय बजट को लेकर उम्मीदें जुड़ी हैं। बीबीएन क्षेत्र के उद्योगपतियों को वित्तीय घाटा कम करने, आयात-निर्यात के अंतर को घटाने और व्यापार को सरल बनाने से जुड़े प्रावधानों की अपेक्षा है।
इसके साथ ही, हिमाचल और लद्दाख को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित बिलासपुर–मनाली–लेह रेल लाइन को केंद्रीय बजट में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस परियोजना को पहले ही वित्त और रक्षा मंत्रालय की स्वीकृति मिल चुकी है।
करीब 489 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना की अनुमानित लागत 1.31 लाख करोड़ रुपये है। परियोजना का 52 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों और ऊंचे पुलों से होकर गुजरेगा। डीपीआर के अनुसार निर्माण कार्य लेह की ओर से शुरू किया जाएगा, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आवाजाही और रसद आपूर्ति को मजबूती मिलेगी।
इस परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में लगभग 2200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्य सुरंगों के साथ एस्केप टनल भी बनाई जाएंगी।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट से हिमाचल प्रदेश को आधारभूत ढांचे, पर्यटन, परिवहन और आर्थिक मजबूती के लिए बड़े प्रावधानों की उम्मीद है।