30 जनवरी: न्यूजीलैंड के बाद अब यूरोपीय यूनियन (ईयू) के देशों से भारत आने वाले सेब पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों में गहरी चिंता बढ़ गई है। बागवानों का कहना है कि सस्ता विदेशी सेब बाजार में आने से स्थानीय सेब को उचित दाम नहीं मिल पाएंगे।
केंद्र सरकार के अनुसार ईयू से केवल 50 हजार मीट्रिक टन सेब ही 20 प्रतिशत आयात शुल्क पर मंगाया जाएगा, जिसमें न्यूनतम आयात मूल्य 80 रुपये प्रति किलो तय किया गया है। यह मात्रा भविष्य में बढ़कर एक लाख टन तक हो सकती है और यह प्रावधान अगले 10 वर्षों तक लागू रहेगा। सरकार का दावा है कि ईयू से आने वाले सेब की न्यूनतम लैंडेड कीमत लगभग 96 रुपये प्रति किलो होगी, जिससे घरेलू कीमतों पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
आंकड़ों के मुताबिक भारत ने वर्ष 2024 में करीब पांच लाख टन सेब का आयात किया, जिसमें सबसे अधिक सेब ईरान, तुर्की और अफगानिस्तान से आया। ईयू से आयातित सेब की मात्रा अपेक्षाकृत कम रही है, लेकिन शुल्क घटने के बाद इसके बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने इसे बागवान विरोधी निर्णय बताते हुए कहा कि यह हिमाचल की सेब बागवानी के हितों पर कुठाराघात है और इस फैसले का केंद्र सरकार के समक्ष विरोध किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि सस्ता विदेशी सेब भारतीय बाजार में लाकर स्थानीय उत्पादकों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
वहीं, हिमाचल प्रदेश फल, फूल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि यह फैसला ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना के विपरीत है और इससे बागवानों के साथ अन्याय होगा।