28 जनवरी: हिमाचल प्रदेश की 3,577 ग्राम पंचायतों में पहली बार निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह प्रशासकीय व्यवस्था लागू की जाएगी। पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद 1 फरवरी से सभी पंचायतें स्वतः भंग हो जाएंगी।
पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने की स्थिति में पंचायतों के दैनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार को प्रशासकों की नियुक्ति करनी पड़ रही है। कार्यकाल समाप्त होते ही पंचायत प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों सहित करीब 30 हजार निर्वाचित प्रतिनिधि पद से मुक्त हो जाएंगे।
पंचायत चुनावों में देरी के बाद हाईकोर्ट के आदेश के चलते अंतरिम प्रशासकीय व्यवस्था की जरूरत पैदा हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग दिसंबर 2025 में पंचायत चुनाव कराने की तैयारी कर रहा था, लेकिन राज्य सरकार ने आपदा का हवाला देते हुए चुनाव स्थगित कर दिए थे। सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने 30 अप्रैल 2026 से पहले पंचायत चुनाव कराना अनिवार्य कर दिया है।
पंचायतीराज विभाग ने प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर सरकार को दो प्रस्ताव भेजे हैं। पहले प्रस्ताव के तहत पंचायत सचिव को ही प्रशासक नियुक्त करने का सुझाव दिया गया है। वहीं, दूसरे प्रस्ताव में तीन सदस्यीय समिति गठित करने की बात कही गई है, जिसमें स्कूल प्रिंसिपल या हेडमास्टर को प्रशासक बनाया जाएगा, जबकि पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सेवक समिति के सदस्य होंगे।
सूत्रों के अनुसार, सरकार अगले दो दिनों के भीतर इस संबंध में अंतिम निर्णय लेकर अधिसूचना जारी कर सकती है। प्रशासकीय व्यवस्था से जुड़ी फाइल पंचायतीराज मंत्री के कार्यालय तक पहुंच चुकी है।