06 फरवरी: हिमाचल प्रदेश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर वर्ष 2025 की इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत सड़क दुर्घटना रिपोर्ट (e-DAR) ने चिंताजनक स्थिति उजागर की है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक संलिप्तता निजी कारों, जीपों और टैक्सियों की पाई गई है।
आंकड़ों के अनुसार, बीते एक वर्ष में कार, जीप और टैक्सी श्रेणी के वाहनों से कुल 801 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा दोपहिया वाहनों से जुड़ी 485 घटनाएं सामने आईं, जबकि ट्रकों से 224, बसों से 71, टेंपो और ट्रैक्टर से 58 तथा डंपर से 17 हादसे दर्ज किए गए हैं।
रिपोर्ट में समय के आधार पर दुर्घटनाओं का विश्लेषण भी किया गया है, जिसमें शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक का समय सबसे अधिक जोखिमभरा बताया गया है। विशेषज्ञों ने इस तीन घंटे की अवधि को ‘डेंजर विंडो’ करार दिया है, क्योंकि इसी दौरान प्रदेश में सबसे ज्यादा सड़क हादसे सामने आए हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हैरानी की बात यह है कि 979 मामलों में किसी स्पष्ट यातायात नियम उल्लंघन का उल्लेख नहीं मिला। हालांकि, जिन कारणों की पहचान की गई है, उनमें रैश ड्राइविंग के 428 मामले, तेज रफ्तार के 359 और गलत ओवरटेकिंग के 110 मामले प्रमुख रहे हैं।
इन बढ़ते हादसों पर नियंत्रण के लिए हिमाचल पुलिस ने सख्त रणनीति तैयार की है। पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी के अनुसार यातायात नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ‘डेंजर विंडो’ के दौरान इंटरसेप्टर वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी और तकनीकी निगरानी को और मजबूत किया जाएगा।
रिपोर्ट के आंकड़ों के आधार पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, ताकि वहां समय रहते पुलिस बल की तैनाती की जा सके। प्रशासन का उद्देश्य तकनीक और सख्त निगरानी के जरिए सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना और कीमती जानों को बचाना है