हिमाचल में QR कोड के बिना नहीं बिकेगी शराब, स्कैन करते ही दिखेगी असली कीमत

3 अप्रैल: हिमाचल प्रदेश सरकार ने आबकारी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए शराब की हर बोतल पर क्यूआर कोड (QR Code) अनिवार्य कर दिया है। 31 मार्च के बाद पैक होने वाली किसी भी बोतल को अब बिना क्यूआर कोड के बेचना गैरकानूनी होगा। इस कदम का उद्देश्य शराब बिक्री में पारदर्शिता लाना और उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाना है।

नई व्यवस्था के तहत ग्राहक अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर बोतल की पूरी जानकारी तुरंत देख सकेंगे। इसमें बोतल की अधिकतम कीमत (MRP), निर्माण तिथि, बैच नंबर, निर्माता का नाम और वैधता से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। स्कैन करने पर मोबाइल स्क्रीन पर जो कीमत दिखाई देगी, वही अंतिम मानी जाएगी।

पहले कीमतें केवल लेबल पर छपी होती थीं, जिससे छेड़छाड़ और ओवरचार्जिंग की शिकायतें सामने आती थीं। अब इस डिजिटल सिस्टम से ऐसे मामलों पर रोक लगेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि 31 मार्च से पहले का पुराना स्टॉक ही बिना क्यूआर कोड के बेचा जा सकेगा। नए स्टॉक पर यह नियम सख्ती से लागू होगा और पुराने स्टॉक को धीरे-धीरे बाजार से हटाया जाएगा।

इस व्यवस्था से अवैध और नकली शराब पर भी लगाम लगेगी, क्योंकि हर बोतल की डिजिटल ट्रैकिंग संभव होगी। यदि कोई दुकानदार तय कीमत से ज्यादा वसूली करता है, तो उपभोक्ता डिजिटल प्रमाण के साथ तुरंत शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

राज्य कर एवं आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. राजीव डोगरा ने बताया कि इस सिस्टम से कंपनियों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि कीमतों में बदलाव होने पर उन्हें बार-बार लेबल बदलने की जरूरत नहीं होगी और वे डिजिटल माध्यम से ही कीमत अपडेट कर सकेंगी।

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