05 फरवरी: हिमाचल प्रदेश में हर साल औसतन 10 हजार से अधिक नए कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी की एक नई स्टडी ने उम्मीद जगाई है कि सावधानी और सही जीवनशैली अपनाकर कैंसर के करीब 40 प्रतिशत मामलों को रोका जा सकता है।
आईजीएमसी शिमला के रेडियोथैरेपी विभाग के अध्यक्ष और रीजनल कैंसर सेंटर के प्रमुख डॉ. मुनीश गुप्ता ने बताया कि विश्व कैंसर दिवस पर जारी इस रिपोर्ट में कैंसर से जुड़े 30 प्रमुख कारणों की पहचान की गई है। इनमें तंबाकू सेवन, शराब, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, वायु प्रदूषण, अल्ट्रावॉयलेट विकिरण और कैंसर पैदा करने वाले संक्रमण प्रमुख हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में दुनिया भर में सामने आए कैंसर के 37 प्रतिशत नए मामले ऐसे कारणों से जुड़े थे, जिन्हें रोका जा सकता है। यह अध्ययन 185 देशों और 36 प्रकार के कैंसर के आंकड़ों पर आधारित है। विश्लेषण में पाया गया कि कैंसर के मामलों में तंबाकू सेवन 15 प्रतिशत, संक्रमण 10 प्रतिशत और शराब सेवन लगभग तीन प्रतिशत तक जिम्मेदार है।
डब्ल्यूएचओ की कैंसर नियंत्रण टीम
के प्रमुख डॉ. आंद्रे इल्बावी ने कहा कि यह पहला वैश्विक विश्लेषण है, जो यह दर्शाता है कि कैंसर का बड़ा जोखिम ऐसे कारणों से जुड़ा है, जिन पर नियंत्रण संभव है।
डॉ. मनीश गुप्ता ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आईजीएमसी शिमला में ही हर साल करीब तीन हजार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें फेफड़ों का कैंसर सबसे अधिक है, जबकि ब्रेस्ट कैंसर के 175 से 200 और सर्वाइकल कैंसर के 150 से 200 मामले प्रतिवर्ष दर्ज किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान, शराब और तंबाकू का सेवन छोड़ना, नियमित व्यायाम करना, संतुलित आहार लेना, घर का बना ताजा भोजन खाना, पैक्ड और प्रिजर्वेटिव युक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करना, सुरक्षित जीवनशैली अपनाना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने से कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। किसी भी असामान्य लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत जांच कराना जरूरी है, ताकि समय रहते इलाज संभव हो सके।